* 15 जून से फाइलों में दफन न्याय: कलेक्ट्रेट और तहसील के चक्कर काट थके स्वर्गीय उसतो के वारिस; अंतिम चरण में तहसीलदार के तबादले का बहाना बनाकर रोकी गई बंटवारा प्रक्रिया।
* ‘बीएस कंपनी’ की जनसुनवाई से पहले षड्यंत्र का आरोप: पीड़ितों का सीधा सवाल- क्या कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए लटकाया गया संयुक्त भूमि का सीमांकन व बंटवारा?
* चारमार तिराहे पर अनिश्चितकालीन धरना: 27 सितंबर से जनसुनवाई स्थल के ठीक सामने जमीन पर उतरेगा पूरा परिवार, मांग न पूरी होने पर सामूहिक आत्मदाह का खुला अल्टीमेटम।
* युवा संगठन घरघोड़ा का खुला समर्थन: प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ युवाओं ने भरी हुंकार, कहा- “रैयतों के हक पर डाका किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं।”
राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू कि रिपोर्ट,,,
दिनांक 24/09/2026
लोकेशन, घरघोड़ा जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़।।
रायगढ़, घरघोड़ा/ जिले के औद्योगिक जनसुनवाई की आड़ में किसानों और भूमिस्वामियों के अधिकारों को दबाने का खेल घरघोड़ा में अब प्रशासनिक गले की फांस बन चुका है। 28 सितंबर को प्रस्तावित ‘बीएस कंपनी’ की जनसुनवाई से ठीक पहले चारमार क्षेत्र में जनआक्रोश चरम पर पहुंच गया है। अपनी ही पुश्तैनी संयुक्त भूमि के बंटवारे के लिए महीनों से दर-दर भटक रहे गुप्ता परिवार ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घरघोड़ा की चौखट पर लिखित नोटिस चस्पा कर आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है।
25 सितंबर को एसडीएम कार्यालय में विधिवत रिसीव कराए गए इस आवेदन ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। प्रार्थी सरधाकर गुप्ता, चिंतामणि गुप्ता और संध्या गुप्ता ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 28 सितंबर की जनसुनवाई से पहले उन्हें उनका वैधानिक हक नहीं मिला, तो वे परिवार सहित आत्मदाह करने को विवश होंगे।
*अफसरों के तबादले की आड़ में हक मारने का खेल -*पीड़ित परिवार द्वारा प्रशासन को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, वे 15 जून से अपनी संयुक्त भूमि के विधिवत बंटवारे के लिए तहसील और कलेक्टर कार्यालय की चौखट घिस रहे हैं। जब तमाम जांचों के बाद बंटवारे की कार्रवाई अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी, तभी अचानक तत्कालीन तहसीलदार (जांच अधिकारी) का स्थानांतरण कर दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी अधिकारी के तबादले के साथ ही नागरिकों का वैधानिक अधिकार और महीनों की कानूनी प्रक्रिया शून्य हो जाती है? परिवार का स्पष्ट आरोप है कि जांच पूरी होने के बावजूद फाइल को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला गया ताकि कंपनी की जनसुनवाई बिना किसी
अड़चन के निपटाई जा सके।
*जनसुनवाई से पहले बंटवारा क्यों? क्या है कॉरपोरेट गठजोड़ का डर? -*
इस आवेदन में पीड़ितों ने गंभीर आशंका जताई है कि 28 सितंबर को प्रस्तावित ‘बीएस कंपनी’ की जनसुनवाई से पहले यदि उनकी संयुक्त भूमि का विधिवत कानूनी बंटवारा नहीं हुआ, तो आने वाले समय में विशालकाय कंपनी तंत्र के सामने अपने भूमि अधिकारों की कानूनी लड़ाई लड़ना उनके लिए असंभव हो जाएगा। संयुक्त खाते की आड़ में जमीन हथियाने और विस्थापन के उचित मुआवजे से वंचित करने की आशंकाओं के बीच परिवार ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ परिवार 27 सितंबर से चारमार मेन रोड तिराहा (जनसुनवाई स्थल के ठीक सामने) अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने जा रहा है।
*युवा संगठन घरघोड़ा का खुला मोर्चा, बढ़ा प्रशासनिक तनाव -* मामले की गंभीरता को देखते हुए अब स्थानीय ‘युवा संगठन घरघोड़ा’ भी खुलकर मैदान में आ गया है। संगठन के
*पदाधिकारियों ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा:*”एक तरफ शासन उद्योगपतियों के लिए लाल कालीन बिछा रहा है, दूसरी तरफ मूल भू-स्वामी अपने वैधानिक अधिकारों के लिए आत्मदाह की नौबत पर पहुंच गए हैं। यदि जनसुनवाई से पहले गुप्ता परिवार का लंबित बंटवारा पारदर्शी तरीके से पूरा नहीं हुआ, तो 27 सितंबर को चारमार तिराहे पर होने वाला धरना पूरे घरघोड़ा के जनआंदोलन में तब्दील हो जाएगा।”
*उल्टी गिनती शुरू: समाधान या टकराव? -*25 सितंबर को एसडीएम दफ्तर में सील-मुहर के साथ दर्ज हुई इस शिकायत के बाद अब गेंद पूरी तरह रायगढ़ जिला प्रशासन और घरघोड़ा एसडीएम के पाले में है। 27 सितंबर को प्रस्तावित धरना और 28 सितंबर को कंपनी की जनसुनवाई के बीच केवल कुछ घंटों का फासला बचा है।
अब देखना यह होगा कि क्या राजस्व अमला नींद से जागकर जनसुनवाई से पहले फाइलों से धूल हटाकर पीड़ित परिवार को उनका हक दिलाता है, या फिर प्रशासनिक हठधर्मिता के चलते चारमार का जनसुनवाई स्थल किसी बड़े जनाक्रोश और अनहोनी का गवाह बनेगा।।



