*मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, तनाव प्रबंधन विषयों पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के माध्यम से दिया गया जागरूकता का संदेश*
*सूरजपु/10 अक्टूबर 2026/* विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिला मानसिक स्वास्थ्य टीम द्वारा पार्वती इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग, रिसर्च एंड मैनेजमेंट बी.एड. कॉलेज, सूरजपुर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस वर्ष Lived Experiences Heard,Real Voices, Real Change की थीम पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के अनुभवों को सुनने, समझने और उन्हें सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट, सूरजपुर श्री आनंद प्रकाश वारियाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट, सूरजपुर श्री आनंद प्रकाश वारियाल की सहभागिता ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक संवेदनशीलता, सम्मानजनक व्यवहार और जरूरतमंद व्यक्तियों को सहयोग उपलब्ध कराने में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका के महत्व को रेखांकित किया।
*व्यक्तिगत अनुभवों को सुनना मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम -डॉ. राजेश पैकरा*
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश पैकरा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे प्रत्येक व्यक्ति का अनुभव महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति की परेशानी को केवल उसके बाहरी व्यवहार से नहीं समझा जा सकता, बल्कि उसकी भावनाओं, परिस्थितियों और अनुभवों को सुनना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोगों को बिना किसी भेदभाव के अपनी बात रखने का अवसर देना, उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से समझना और समय पर उचित सहायता उपलब्ध कराना सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
*मानसिक समस्याओं को समझें, समय पर लें विशेषज्ञ की सलाह – डॉ. अंकित शर्मा*
मनोचिकित्सक डॉ. अंकित शर्मा ने कहा कि तनाव, चिंता, अवसाद एवं अन्य मानसिक समस्याएं किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में अपनी परेशानी को साझा करना, विश्वसनीय व्यक्ति से बातचीत करना तथा आवश्यकता पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे लोगों की बात धैर्यपूर्वक सुनने तथा उन्हें उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. छवि रानी मंडल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक विकास को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं खुलकर साझा करने, दूसरों की भावनाओं को समझने और जरूरतमंद साथियों के प्रति सहयोगपूर्ण व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, भावनात्मक सहयोग, तनाव प्रबंधन, मानसिक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता एवं आत्महत्या रोकथाम जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश पैकरा, मनोचिकित्सक डॉ. अंकित शर्मा, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट श्री सचिन मातुरकर, सुश्री प्रियंका मंडल तथा महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. छवि रानी मंडल सहित शिक्षकगण एवं विद्यार्थी शामिल हुए।



