जरूरतमंदों के लिए बनी योजना के लाभार्थियों की पात्रता की जांच की मांग, चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता पर उठे सवाल,,,
राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू कि विशेष रिपोर्ट,,,,
लोकेशन,चरचा कालरी जिला कोरिया छत्तीसगढ़..
कोरिया/चरचा कालरी, दिनांक 26 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान राशि के वितरण को लेकर चर्चा क्षेत्र में सवाल उठने लगे हैं। सामने आए एक दस्तावेज में क्रमांक 47 से 58 तक कुल 12 लाभार्थियों के नाम दर्ज हैं। प्रत्येक के सामने ₹10,000 की सहायता राशि अंकित है। इस प्रकार प्रस्तुत सूची में कुल ₹1 लाख 20 हजार रुपये का उल्लेख है। अब सवाल उठ रहा है कि सहायता राशि के वितरण में पात्रता के निर्धारित मापदंडों का पालन किया गया या नहीं और वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई?

*सूची में किनके नाम दर्ज हैं?*
प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार, सूची में निम्नलिखित नाम और क्रमांक दर्ज हैं—
1. सत्य नारायण — क्रमांक 380556
2. सोनिया — क्रमांक 380557
3. अनिल पासवान — क्रमांक 380558
4. मनोज कुमार ठाकुर — क्रमांक 380559
5. मनोज कुमार विश्वकर्मा — क्रमांक 380560
6. आदित्य कुमार जायसवाल — क्रमांक 380561
7. संदीप कश्यप — क्रमांक 380562
8. मनोज कुमार — क्रमांक 380563
9. दीपा सिंह — क्रमांक 380564
10. देव कुमारी — क्रमांक 380565
11. अशरफ अली — क्रमांक 380566
12. दुर्गेश ठाकुर — क्रमांक 380567
दस्तावेज में सभी 12 नामों के सामने ₹10,000 की राशि अंकित है। हालांकि, इस दस्तावेज से अकेले यह पुष्टि नहीं होती कि सभी के खातों में राशि वास्तव में पहुंची, लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति क्या थी या सहायता के लिए उनके आवेदनों की जांच किस प्रकार की गई।
*जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल*
स्थानीय स्तर पर इस वितरण को लेकर जनप्रतिनिधियों की भूमिका और लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश सिंह से संबंधित परिवार के लोगों अथवा करीबी व्यक्तियों को लाभ दिलाए जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध सूची में लाभार्थियों के साथ जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक संबंध, उनकी मासिक आय अथवा चयन में किसी प्रकार के हस्तक्षेप का प्रमाण दर्ज नहीं है। इसलिए इन आरोपों की पुष्टि संबंधित आवेदन, आय संबंधी दस्तावेज, अनुशंसा पत्र और स्वीकृति अभिलेखों की जांच से ही हो सकती है।
*गरीबों के हक और सरकारी सहायता की पारदर्शिता का सवाल*
मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान जैसी सहायता योजनाओं का उद्देश्य पात्र जरूरतमंदों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी अपात्र व्यक्ति को नियमों के विपरीत लाभ दिए जाने की शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच होना जरूरी है। वहीं, केवल किसी व्यक्ति के जनप्रतिनिधि से संबंध होने के आधार पर उसे अपात्र नहीं माना जा सकता; वास्तविक पात्रता निर्धारित नियमों और अभिलेखों से ही तय होगी। क्षेत्र में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि जरूरतमंद आवेदकों की पहचान कैसे की गई, उनकी आर्थिक स्थिति का सत्यापन किसने किया और सहायता राशि स्वीकृत करने से पहले किन दस्तावेजों की जांच की गई।
*प्रशासन से इन बिंदुओं पर जांच की मांग*
*इस मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की जा सकती है कि—*
– प्रस्तुत सूची की प्रामाणिकता और सभी लाभार्थियों की पात्रता की जांच कराई जाए।
– लाभार्थियों के आवेदन, आय प्रमाणपत्र, अनुशंसा और स्वीकृति संबंधी अभिलेखों का परीक्षण किया जाए।
– यदि किसी लाभार्थी का संबंधित जनप्रतिनिधि से पारिवारिक या अन्य संबंध है, तो उसकी तथ्यात्मक पुष्टि कर चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता जांची जाए।
– सहायता राशि के वितरण की तारीख, वास्तविक भुगतान और लागू नियमों के पालन की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
– जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
अब मुख्य सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग इस सूची और लाभार्थियों की पात्रता की निष्पक्ष जांच कराएगा? सरकारी सहायता का उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना है। इसलिए इस मामले में दस्तावेजों के आधार पर जांच, पारदर्शिता और प्रशासन का स्पष्ट जवाब जरूरी है।
नोट: प्रकाशन के बाद संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष और नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश सिंह का जवाब अगर आएगा तो उसे भी अवश्य प्रकाशित करते हुए उनके पक्ष का भी समाचार प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए आपसभी तक पहुंचाया जाएगा।।



