आज दिनांक 25 सितंबर 2026 दिन शुक्रवार को वंदे मातरम् राष्ट्र गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने तथा समाज द्रष्टा व मार्गदर्शक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के उपलक्ष्य में आज संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय, अंबिकापुर में ‘नमामि भारतम्—वंदे भारत मातरम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत सामूहिक वंदे मातरम् गायन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रव्यापी आयोजन के अंतर्गत देशभर में एक साथ एक स्वर में आयोजित किया जा रहा है । कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सम सामायिक भारतीयों एवं भावी पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता, देश के विकास व मानव कल्याण की भावना से ओत-प्रोत के भाव से राष्ट्रीय गीत ” वंदे मातरम् ” के ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी मंगल पाण्डेय संयोजक नवा बिहान नशा मुक्ति अभियान एवं परामर्श केंद्र सरगुजा, विशिष्ट अतिथि युवा समाजसेवी अनिल कुमार मिश्रा निदेशक छत्तीसगढ़ प्रचार एवं विकास संस्थान अम्बिकापुर, तथा हिना खान अध्यक्ष उमंग महिला एवं बाल उत्थान सोसायटी अम्बिकापुर उपस्थित रहीं। अतिथि साक्षी के रूप में पूजा रानी सहायक प्राध्यापक सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय अम्बिकापुर उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के सामूहिक गायन से किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ भेंट कर किया गया।निर्धारित समय प्रातः 11:00 बजे पूरे देश के साथ एक स्वर में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया।
इस अवसर पर श्रीमती सुमन पाण्डेय ने वंदे मातरम् का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि ‘वंदे मातरम्’ बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रगीत है। जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रप्रेम और एकता की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका से चिर -परिचित कराते हुए इसके महत्व और उद्देश्य को समझाया ।
तत्पश्चात् श्री अनिल कुमार मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि वंदे मातरम् हम सभी ने बचपन से पढ़ा और सुना और गाया है। लेकिन इसके पीछे निहित राष्ट्रभक्ति, मातृभूमि के प्रति सम्मान एवं त्याग की भावना को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की इसी कड़ी को निरंतरता देते हुए वरिष्ठ समाजसेवी मंगल पाण्डेय ने वंदे मातरम् के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संघर्ष की प्रेरणादायी अभिव्यक्ति है। उन्होंने युवाओं को देश की एकता, अखंडता एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने चट्टोपाध्याय की रचना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह रचना उस समय रची गई। जब मां भारती गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हुई थी और अपनी हृदय विदारक दुर्दशा से छटपटाती हुई स्वतंत्रता की पुकार कर रही थी।उस समय वंदे मातरम मील का पत्थर सिद्ध हुआ जो लोगों में जोश, जुनून और त्याग – बलिदान की भावना भरकर हर वह संघर्ष कर गुजरने के लिए तैयार किया ।जिससे मां भारती स्वतंत्रता प्राप्त कर दुनिया को मानवता का सीख दी । इनका उद्बोधन हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत रहा। जो भारत भूमि पर सर्वस्व- न्यौछावर करने के लिए प्रेरित किया ।
कार्यक्रम को आगे बढ़ते हुए श्रीमती हिना खान ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना मातृभूमि के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना को अभिव्यक्त करने के उद्देश्य से हुई थी। इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीयों को एकजुट करने और उनमें देशभक्ति की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम आखिरी कड़ी में महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. पूजा दुबे ने कहा कि महाविद्यालय में अब तक प्रार्थना के दौरान वंदे मातरम् की प्रथम पद्यांश का गायन किया जाता था,जो महाविद्यालय के प्राचार्य के निर्देशन में अब यह निर्णय लिया गया है कि प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में संपूर्ण वंदे मातरम् का सामूहिक गायन कराया जाएगा।ताकि प्रशिक्षार्थियों में राष्ट्रीय भावना एवं मातृभूमि के प्रति सम्मान को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में उनके ज्ञानयुक्त अनुभवों को ग्रहण करने की जिज्ञासा जताई ।
यह संपूर्ण कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अंजन सिंह के निर्देशन एवं कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पूजा दुबे के नेतृत्व में सहायक प्राध्यापक श्रीमती सुमन पाण्डेय, डॉ. रानी पाण्डेय, श्रीमती नीरू त्रिपाठी एवं श्रीमती चंदा सिंह के प्रयास में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मंच व मीडिया संचालन में तृतीय सेमेस्टर के प्रशिक्षार्थियों का सहयोग प्रशंसनीय रहा तथा बी.एड. प्रथम सेमेस्टर के प्रशिक्षार्थियों ने सक्रियता पूर्ण भागीदारी निभाकर जन समूह को भारत की अखंडता का संदेश दिया।



