राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू कि विशेष रिपोर्ट,,,
दिनांक,01/11/2026
लोकेशन, बिहारपुर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़।।
सूरजपुर, जिले के बिहारपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत महुली बीट के कक्ष क्रमांक 555 में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। रोहिना पहाड़ के नीचे वन भूमि पर बनाई गई ईंट की दीवार को हटाने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध और सवालों का सामना करना पड़ा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मांग की कि यदि वन भूमि पर अतिक्रमण हटाया जा रहा है तो केवल चिन्हित किए गए एक स्थान पर ही कार्रवाई क्यों, बल्कि क्षेत्र में जहां-जहां कब्जे किए गए हैं, उन सभी अतिक्रमणों को हटाया जाना चाहिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहारपुर वन परिक्षेत्र के महुली बीट अंतर्गत कक्ष क्रमांक 555 में रोहिना पहाड़ के नीचे वन भूमि पर अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आया था। बताया जा रहा है कि संबंधित स्थान पर ईंटों से दीवार का निर्माण कर कब्जे की स्थिति बनाई गई थी। वन विभाग की टीम जब उक्त दीवार को हटाने के लिए मौके पर पहुंची तो ग्रामीणों और वनकर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई और कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
*एक स्थान पर कार्रवाई, बाकी कब्जों का क्या?*
ग्रामीणों का मुख्य सवाल यह रहा कि यदि वन भूमि पर अतिक्रमण हुआ है तो कार्रवाई निष्पक्ष और समान रूप से होनी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग उठाई कि महुली बीट के संबंधित क्षेत्र में जितने भी स्थानों पर वन भूमि पर कब्जे किए गए हैं, उन सभी की जांच कराई जाए और नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई किसी एक व्यक्ति या एक स्थान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वन भूमि पर जहां भी अवैध कब्जे हैं, वहां विभाग को समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए।
*छोटे झाड़ के जंगल की भूमि पर कब्जे का भी उठा मुद्दा,,*
इस पूरे मामले में छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज भूमि को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में छोटे झाड़ के जंगलों को हटाकर भूमि पर कब्जा किया गया है। यदि यह आरोप सही है तो यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों, वन भूमि की वास्तविक स्थिति और मौके पर हुए निर्माण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
*वन विभाग की कार्रवाई और निष्पक्षता पर निगाहें*
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग महुली बीट के कक्ष क्रमांक 555 में संपूर्ण वन भूमि का सीमांकन कराकर सभी कथित अतिक्रमणों की पहचान करेगा? क्या रोहिना पहाड़ के नीचे ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी कब्जों की स्थिति की जांच होगी? और यदि छोटे झाड़ के जंगलों को हटाकर कब्जा किए जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी? वन भूमि और जंगलों का संरक्षण केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। ऐसे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पारदर्शी, निष्पक्ष और समान रूप से होना जरूरी है। फिलहाल महुली बीट में कार्रवाई के दौरान हुए विवाद के बाद ग्रामीणों की मांग और वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।।



