राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू कि विशेष रिपोर्ट,,,
दिनांक 31/10/2026
लोकेशन, भटगांव कालरी, जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़।।
सूरजपुर /भटगांव भूमिगत कोयला खदान के भविष्य पर मंडरा रहे बंदी के संकट ने अब श्रमिकों की चिंता बढ़ा दी है। पर्यावरणीय सहमति नहीं मिलने के कारण खदान के बंद होने की आशंका के बीच यहां कार्यरत लगभग 1100 श्रमिकों के सामने रोजगार, स्थानांतरण और विस्थापन जैसी गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से जुड़े श्रमिक संगठन ने 27 अक्टूबर से खदान के बाहर 13 सूत्रीय मांगों को लेकर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। श्रमिकों का कहना है कि खदान के भविष्य को लेकर प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को गंभीरता से पहल करनी चाहिए, ताकि वर्षों से इस खदान में अपनी सेवाएं दे रहे श्रमिकों का भविष्य अंधकारमय न हो।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भटगांव अंडरग्राउंड कोल माइंस को पर्यावरणीय सहमति नहीं मिलने के कारण बंद होने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। यदि खदान बंद होती है तो इसका सीधा असर यहां कार्यरत करीब 1100 श्रमिकों और उनसे जुड़े परिवारों पर पड़ सकता है। श्रमिकों के सामने स्थानांतरण, विस्थापन और भविष्य में रोजगार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में बीएमएस संगठन ने श्रमिकों के हितों और खदान के संचालन से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। संगठन की ओर से 27 अक्टूबर से शुरू किया गया क्रमिक भूख हड़ताल लगातार जारी है। इसी क्रम में संगठन के उप महामंत्री दिलीप मंडल एवं संयुक्त सलाहकार समिति के सदस्य हरेंद्र सिंह ने 24 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर आंदोलन को आगे बढ़ाया। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि श्रमिकों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर जल्द समाधान निकाला जाना आवश्यक है। उनका उद्देश्य केवल खदान के संचालन का मुद्दा उठाना नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के रोजगार और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है, जिनकी आजीविका इस खदान पर निर्भर है। बीएमएस ने प्रबंधन के समक्ष 13 सूत्रीय मांगें रखते हुए स्पष्ट किया है कि श्रमिकों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती और समस्या का समाधान नहीं निकाला जाता है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके तहत धरना-प्रदर्शन के साथ चक्काजाम जैसे कदम उठाने की भी चेतावनी दी गई है।
आंदोलन में बीएमएस के कंपनी सुरक्षा समिति सदस्य संजय सिंह, जेसीसी सदस्य राजेंद्र सिंह, कोमल सक्सेना, शिवराम सिंह, जगन्नाथ शर्मा, राजेश पटेल, अभिषेक गोल्डी, संतोष प्रजापति, सौरभ मंडल, मंगलू राम, प्रमोद सिंह, संदीप पटेल एवं कृपा शंकर मिश्रा सहित संगठन के अनेक सदस्य शामिल होकर श्रमिकों की मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद कर रहे हैं।
*1100 श्रमिकों के साथ हजारों परिजनों की आजीविका का सवाल*
भटगांव भूमिगत कोयला खदान का मामला अब केवल एक औद्योगिक इकाई के संचालन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे जुड़े लगभग 1100 श्रमिकों और उनके परिवारों की आजीविका का सवाल भी बन गया है। खदान बंद होने की स्थिति में श्रमिकों का स्थानांतरण किस प्रकार होगा, उनके रोजगार की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और विस्थापन की परिस्थितियों में उनके हितों का संरक्षण कौन करेगा, ऐसे कई सवाल सामने खड़े हैं।
फिलहाल बीएमएस का क्रमिक भूख हड़ताल आंदोलन जारी है। अब देखना होगा कि प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार विभाग श्रमिकों की इन मांगों पर कब तक सकारात्मक निर्णय लेते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि पर्यावरणीय सहमति से जुड़ी समस्या का समाधान निकालकर खदान का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा या फिर 1100 श्रमिकों को अनिश्चितता के बीच अपने भविष्य की लड़ाई लड़नी पड़ेगी।



