*दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम, 1955 के प्रावधानों की समीक्षा कर खादिमों की पहचान सुनिश्चित करने की मांग; खादिमों की आड़ में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और ज़ायरीन से बदसलूकी पर जताई गंभीर चिंता*
नई दिल्ली, 04 नवंबर 2026। ऑल इंडिया दरगाह कमेटी के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने अजमेर शरीफ दरगाह में एक महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू से मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
जमाल सिद्दीकी ने केंद्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक आस्थाओं से जुड़े स्थलों पर आने वाली महिलाओं सहित प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर पीड़िता को न्याय एवं आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम, 1955 (Durgah Khwaja Saheb Act, 1955) के प्रावधानों एवं संबंधित उपविधियों के अंतर्गत खादिमों की पहचान और अधिकृत भूमिका सुनिश्चित करने की व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि खादिमों की आड़ में बाहरी एवं अनधिकृत व्यक्तियों के दरगाह परिसर में प्रवेश करने तथा ज़ायरीन के साथ कथित बदसलूकी की घटनाएं दरगाहों की सुरक्षा, व्यवस्था और गरिमा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
जमाल सिद्दीकी ने कहा कि दरगाहों में अधिकृत खादिमों की पहचान सुनिश्चित करना, बाहरी एवं अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण करना तथा प्रत्येक ज़ायरीन की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना समय की आवश्यकता है।
ऑल इंडिया दरगाह कमेटी की प्रमुख मांगें
1. अजमेर शरीफ की घटना की निष्पक्ष जांच: महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए तथा पीड़िता को न्याय एवं आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए।
2. दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम, 1955 का प्रभावी अनुपालन: अधिनियम के प्रावधानों एवं संबंधित उपविधियों की समीक्षा कर खादिमों की पहचान, अधिकृत भूमिका एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
3. खादिमों की पहचान एवं आधिकारिक पंजीकरण: दरगाह में कार्यरत अधिकृत खादिमों की सत्यापित सूची तैयार की जाए। उनके नाम, पते, फोटो, पहचान एवं दरगाह में उनकी अधिकृत भूमिका का विवरण संबंधित प्रबंधन के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
4. बाहरी एवं अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर नियंत्रण: खादिमों की आड़ में बाहरी व्यक्तियों के दरगाह परिसर में प्रवेश और ज़ायरीन से कथित बदसलूकी की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी एवं सत्यापन व्यवस्था लागू की जाए।
5. आचार संहिता एवं जवाबदेही: खादिमों के लिए स्पष्ट आचार संहिता बनाई जाए, जिसमें महिला श्रद्धालुओं, बुजुर्गों एवं सभी ज़ायरीन के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित हो। शिकायतों के निवारण के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों की जवाबदेही तय की जाए।
6. देशव्यापी व्यवस्था लागू करना: खादिमों की पहचान, पंजीकरण एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यवस्था केवल अजमेर शरीफ तक सीमित न रहे, बल्कि देशभर की प्रमुख दरगाहों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाए। इसके लिए संबंधित दरगाह प्रबंधन, राज्य सरकारों एवं सक्षम संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित किया जाए।
दरगाहों की पवित्रता, ज़ायरीन की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि
जमाल सिद्दीकी ने कहा कि दरगाहें केवल इबादत और जियारत के स्थल नहीं हैं, बल्कि भारत की साझा संस्कृति, सूफी परंपरा, इंसानियत, प्रेम और भाईचारे की अमूल्य विरासत भी हैं। इन पवित्र स्थलों पर आने वाले प्रत्येक ज़ायरीन की सुरक्षा, सम्मान और विश्वास की रक्षा करना सभी संबंधित संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑल इंडिया दरगाह कमेटी की यह पहल किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि दरगाहों की पवित्रता, पारदर्शिता, अनुशासन और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए है।
अंत में जमाल सिद्दीकी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू से आग्रह किया कि इस गंभीर विषय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए अजमेर शरीफ की घटना की निष्पक्ष जांच तथा दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम, 1955 के प्रभावी अनुपालन एवं देशभर की दरगाहों में खादिमों की पहचान और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस पहल की जाए।



