*अंबिकापुर l* शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिक्षा प्रभाग, अंबिकापुर द्वारा *“विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका”* विषय पर भव्य संगोष्ठी एवं शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान, दीप प्रज्ज्वलन, स्वागत नृत्य, नाटिका, गीत एवं संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि *संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा के कुलपति डॉ. राजेन्द्र लखपाले* तथा विशिष्ट अतिथि *संयुक्त संचालक सरगुजा संभाग डॉ. राजेश कुमार सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा, इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.एन. खरे, पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सिन्हा, श्री साईं बाबा कॉलेज के प्राचार्य राजेश श्रीवास्तव, पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य आर.जे. पाण्डेय, डायट प्राचार्य के.सी. गुप्ता, सरस्वती ज्ञान महाविद्यालय की प्राचार्य श्रद्धा मिश्रा,* ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र संचालिका *राजयोगिनी बीके विद्या दीदी* सहित अंबिकापुर के विभिन्न शासकीय एवं निजी विद्यालयों तथा महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
*मुख्य अतिथि डॉ. राजेन्द्र लखपाले* ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरगुजा संभाग के सभी शिक्षक सुचारू रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि *शिक्षक ही राष्ट्र का निर्माता होता है। शिक्षक ही विद्यार्थियों को ऐसा मार्गदर्शन देता है जिससे वे आगे चलकर आईएएस, डॉक्टर, इंजीनियर और अच्छे नागरिक बनते हैं।* उन्होंने भारत की गुरुकुल शिक्षा की विश्वव्यापी प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए शिक्षकों से राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया। रामकृष्ण परमहंस के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने *“आत्म दीपो भवः”* की भावना से कार्य करने की प्रेरणा दी।
*संयुक्त संचालक डॉ. राजेश कुमार सिंह* ने कहा कि यदि वर्ष 2037 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है तो प्रत्येक शिक्षक को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका स्वयं निर्धारित करनी होगी। उन्होंने कहा कि जिन गुरुओं से हमने शिक्षा प्राप्त की है, उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
*जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा* ने कहा कि आधुनिक युग में विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब शिक्षक बच्चों की गतिविधियों एवं उनके संस्कारों पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आज तकनीक और आधुनिकता के बीच बच्चों में संस्कार एवं माता-पिता के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखना भी शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हैl *ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र संचालिका एवं सरगुजा संभाग राजयोगिनी बीके विद्या दीदी* ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए *ज्ञानवान नागरिक, संस्कारवान युवा, ईमानदार नेतृत्व एवं चरित्रवान समाज* की आवश्यकता है और इस दिशा में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने शिक्षा एवं आध्यात्मिकता को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश होने पर विद्यार्थी मूल्यवान एवं चरित्रवान बनते हैं। आज जो भी महान व्यक्तित्व बने हैं, उन्होंने अपने जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को स्थान दिया है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता का अर्थ है अपनी सच्ची पहचान को जानना—“मैं कौन हूं, कहां से आया हूं, मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।”आध्यात्मिकता हमें जीवन के सही उद्देश्य एवं मूल्यों की पहचान कराती है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को राजयोग का अभ्यास कराया तथा *सामूहिक नशा मुक्ति प्रतिज्ञा* दिलाई।
*इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.एन. खरे* ने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु की सेवाओं का स्मरण करते हुए कहा कि देशसेवा की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रावण के पास ज्ञान था, लेकिन उसमें ज्ञान का अहंकार था, जबकि श्रीराम के जीवन में ज्ञान के साथ विनम्रता थी। उन्होंने कहा कि *शिक्षक को किसी भी प्रकार का अहंकार नहीं होना चाहिए, क्योंकि शिक्षक स्वयं में एक महान व्यक्तित्व होता है।*
*डायट प्राचार्य के.सी. गुप्ता* ने कहा कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में शिक्षक का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि प्रतिदिन मनाया जाना चाहिए। शिक्षक जब विद्यार्थियों से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं और उन्हें अपने बच्चों के समान मानते हैं, तभी उनमें संस्कारों का विकास होता है।
*श्री साईं बाबा कॉलेज के प्राचार्य राजेश श्रीवास्तव* ने कहा कि शिक्षा से महान कुछ भी नहीं है। मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य केवल शिक्षक ही कर सकता है। उन्होंने कहा कि *गूगल जानकारी दे सकता है, लेकिन संवेदनशीलता और मानवीय भावनाएं नहीं दे सकता।*
*पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सिन्हा* ने कहा कि शिक्षक के सम्मान के लिए किसी एक तिथि की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। शिक्षक का सम्मान प्रतिदिन होना चाहिए। भारतीय संस्कृति में प्रारंभ से ही गुरु-शिष्य परंपरा एवं गुरु की महिमा का विशेष स्थान रहा है।
*पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य आर.जे. पाण्डेय* ने कहा कि आज पाठ्यक्रम में गीता एवं भागवत जैसे विषयों को शामिल किया गया है, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाले और उनके मूल संदेश को जीवन में उतारने वाले शिक्षकों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी साधनों के बढ़ते प्रभाव के कारण शिक्षक और विद्यार्थी के बीच दूरी बढ़ रही है, जिसे कम करने की आवश्यकता हैl
कार्यक्रम में *राष्ट्रीय एवं राजकीय पुरस्कार से सम्मानित कथक नृत्यांगना बालिका *सृष्टि मिश्रा* द्वारा मनमोहक स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों को सम्मान पट्टिका, श्रीफल, प्रमाण-पत्र एवं ईश्वरीय सौगात भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं *राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक देवेंद्र नाथ दुबे* को भी ब्रह्माकुमारीज द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया। तथा *गिरीश गुप्ता* को साक्षर भारत अभियान में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता *मंगल पांडे* एवं कवि *संतोष सरल* की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए शिक्षकों के सम्मान एवं विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन *ब्रह्माकुमारी प्रतिमा बहन* द्वारा किया गया। कार्यक्रम में अंबिकापुर के विभिन्न शासकीय एवं निजी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



