“हाँ, सड़कें बेहद खराब हैं” — समस्या से मुंह मोड़ने के बजाय जिम्मेदारी स्वीकार करना बना चर्चा का विषय,,,
राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू की रिपोर्ट,,,,
दिनांक 10/09/2026,
लोकेशन, अम्बिकापुर जिला सरगुजा, छत्तीसगढ़।।
सरगुजा/अंबिकापुर, जहां आमतौर पर जब किसी जनप्रतिनिधि के आवास का घेराव होता है, तो राजनीतिक गलियारों में इसे दबाव और विरोध की स्थिति के रूप में देखा जाता है। लेकिन सरगुजा में कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल का रवैया इस पूरे घटनाक्रम से अलग नजर आया। सड़क की बदहाली को लेकर पहुंचे लोगों के बीच मंत्री ने समस्या से बचने या जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के बजाय साफ शब्दों में स्वीकार किया कि “हाँ, सड़कें बेहद खराब हैं।”
मंत्री के इस स्पष्ट स्वीकारोक्ति को उनके समर्थक सरगुजिहापन और जनता से सीधे संवाद की मिसाल बता रहे हैं। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि का काम केवल अपनी उपलब्धियां गिनाना नहीं, बल्कि जनता की परेशानी को स्वीकार कर उसका समाधान कराने की जिम्मेदारी लेना भी है।
सड़क की खराब स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी स्वाभाविक है। ग्रामीण और आम नागरिक लंबे समय से बेहतर आवागमन की मांग करते रहे हैं। ऐसे में मंत्री द्वारा सड़क की वास्तविक स्थिति को स्वीकार करना और समस्या के समाधान की दिशा में पहल का भरोसा देना एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
*विरोध के बीच जनता से संवाद को बताया अहम*
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, किसी मंत्री या बड़े जनप्रतिनिधि के आवास के घेराव जैसी स्थिति में अक्सर तनाव बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे समय में जनता के बीच रहकर उनकी बात सुनना और समस्या को स्वीकार करना संवाद की राजनीति को मजबूत करता है।
कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल के समर्थकों का कहना है कि जनता की नाराजगी को सुनना कमजोरी नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की जवाबदेही का हिस्सा है। सड़क खराब है तो उसे अच्छा बनाने की जिम्मेदारी भी सरकार और संबंधित विभाग की ही है।
अब सवाल केवल स्वीकारोक्ति तक सीमित नहीं है। जनता यह देखना चाहेगी कि जिन सड़कों की बदहाली स्वीकार की गई है, उनके सुधार के लिए कब तक ठोस कार्रवाई शुरू होती है और कब तक लोगों को बेहतर सड़क की सुविधा मिलती है।
राजनीति में बयान बहुत होते हैं, लेकिन जनता के सामने समस्या को स्वीकार कर समाधान की जिम्मेदारी लेना ही असली परीक्षा है। सरगुजा की जनता अब इसी स्वीकारोक्ति को जमीन पर होने वाले काम में बदलते हुए देखना चाहती है।



