बासेपुर में दो महिलाओं की नृशंस हत्या कर न्यायालय से सज़ा पाए हत्यारे शाबीर आलम,साकिब अफ़ज़ल झारखंड से फरार होकर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सबसे बड़े शहर अंबिकापुर में आकर आराम से रहते रहे और तो और यहां मकान भी बनवा लिया, नेताओं से भी मिलते रहे ये बेहद गंभीर मामला है। इसके खुलासे के बाद छत्तीसगढ़ के ख़ुफ़िया विभाग की भी अंदरखाने जमकर किरकिरी हुई जो अभी तक जारी है क्योंकि ये हत्यारे फ़िर यहां से भी फरार हो गए हैं। अब इन्हें संरक्षण देने वालों की कई महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा ने जानकारी मांगी है।

सूत्रों की मानें तो इस बेहद गंभीर मामले पर सरगुजा पुलिस के ढीले रवैये पर आईजी दीपक कुमार झा और डीजीपी अरुण देव गौतम बेहद नाराज़ हैं साथ ही खुफिया विभाग के मुखिया अमित कुमार जो अपनी तेज शैली के लिए जाने जाते हैं वो भी खफ़ा हैं।
सवाल ये कि इतने बड़े अधिकारियों की नाराज़गी के बाद भी यहां का परिवहन विभाग और बैंक के अधिकारी आर्थिक लेनदेन पर अभी तक किसके दबाव में जानकारी नहीं दे रहे हैं?
पुलिस के आला अधिकारी स्वयं मान रहे हैं कि इस मामले का खुलासा सरकार के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि पूर्व डिप्टी सीएम टी एस सिंहदेव ने जिस तरह से मुखर होके पहल से बात करते हुए संरक्षण देने वालों को सह अभियुक्त बनाने की मांग की है वो आने वाले दिनों में चुनाव में सरकार की किरकिरी कराने के लिए काफी हैं।
सबसे बड़ा सवाल राज्य के गृह मंत्री पर भी उठने लगा है कि जब किसी राज्य की शीर्ष अदालत से सज़ा पाए कुख्यात हत्यारे छत्तीसगढ़ में आके आराम से रहकर निकल भी जाएं और अब तक इनके और इनके संरक्षण दाताओं पर कई प्रमाण के बाद भी कार्यवाही न हो तो ये सरकार की फज़ीहत कराने के लिए एक मुद्दा ही पर्याप्त होगा।
देखना ये है कि महिलाओं के आत्म सम्मान की बात करने वाली भाजपा जिसने राज्य में स्मृति ईरानी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है वो इस संगीन और चौंकाने वाले मामले में राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा की क्लास लेती हैं या नहीं?
वहीं सरगुजा के तीन मंत्री जिसमें सबसे वरिष्ठ मंत्री राम विचार नेताम समेत महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस मामले में स्वयं से जनहित में कोई पहल की और यदि नहीं की तो क्यों नहीं की इस पर इन तीन मंत्रियों को भी कटघरे में खड़ा करतीं हैं या नहीं?
भाजपा पिछली बार भूपेश सरकार पर ध्वस्त कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाके मोदी की गारंटी पर आमजन से वोट मांगी थी ये बात अब भाजपा याद रखी है या वो खाली चुनावी स्टंट था ये आने वाला समय ही बताएगा बहरहाल अभी जो समय बीत रहा है और जो पल बीत चुके हैं वो राज्य की कानून व्यवस्था पर इन सब मुद्दों के कारण इतने बड़े सवाल खड़े कर चुके हैं जिसका जवाब सिर्फ़ और सिर्फ़ कुछ काम करके ही देना होगा क्योंकि ये पब्लिक है वो सब जानती है।



