आखिर कितनी और जानें जाने के बाद जागेगा प्रशासन? वन विभाग की निष्क्रियता पर कांग्रेस नेता परवेज आलम गांधी ने उठाए सवाल
अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के बलरामपुर,सूरजपुर जिले में कबरा हाथी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले छह महीनों में इस एक हाथी के हमलों में लगभग 12 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली में अपेक्षित गंभीरता नजर नहीं आ रही है। लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की तैयारियों, जवाबदेही और वन्यजीव प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस नेता परवेज आलम गांधी ने कहा कि बलरामपुर और सूरजपुर जिले के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग हर दिन डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को खेतों में जाने, जंगल से गुजरने और अपने घरों से बाहर निकलने तक में जान का खतरा बना हुआ है। कबरा हाथी लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहा है, लेकिन वन विभाग की कार्रवाई अब तक प्रस्तावों और अनुमति की प्रक्रिया तक सीमित दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ही हाथी के हमलों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी और प्रभावी समाधान सामने नहीं आया। क्या वन विभाग और प्रशासन किसी और बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं? आखिर आम ग्रामीणों की जान की कीमत इतनी कम क्यों समझी जा रही है?
परवेज आलम गांधी ने कहा कि वन विभाग का काम केवल हाथियों की लोकेशन बताना, घटना के बाद मौके पर पहुंचना और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी करना नहीं है। विभाग की पहली जिम्मेदारी लोगों की जान बचाना है। जब किसी हाथी के लगातार आक्रामक हमलों की जानकारी विभाग को है, तो समय रहते विशेषज्ञों की मदद से ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
उन्होंने राज्य सरकार और वन मंत्री से मांग की कि कबरा हाथी के प्रबंधन के लिए तत्काल विशेषज्ञों की टीम गठित की जाए। वैज्ञानिक तरीके से हाथी की निगरानी, रेडियो कॉलरिंग, आवश्यकतानुसार ट्रैंक्यूलाइज कर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने अथवा पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। साथ ही प्रभावित गांवों में अलर्ट सिस्टम, प्रशिक्षित वनकर्मियों की तैनाती, नियमित गश्त और ग्रामीणों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे। अब केवल आश्वासन और कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा।
12 मौतें कोई सामान्य आंकड़ा नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता का सवाल हैं। सरकार तत्काल कार्रवाई करे, ताकि किसी और परिवार का घर उजड़ने से बचाया जा सके।
परवेज आलम गांधी
अंबिकापुर



