शिव मंदिर, बी-टाइप कॉलोनी, कोरिया नीर प्लांट और फिल्टर प्लांट की ओर से निकल रहे भारी वाहन, बाउंड्री वॉल से लेकर विद्युत व्यवस्था तक नुकसान की शिकायत; प्रशासन से जांच की मांग
संवाददाता/सौरभ साहू
दिनांक 20/09/2026
लोकेशन,चरचा कालरी जिला कोरिया छत्तीसगढ़।।
कोरिया / बैकुंठपुर,जिले के शिवपुर-चरचा क्षेत्र में रेलवे अंडरब्रिज के आगे सड़क के नीचे लगी ह्यूम पाइप क्षतिग्रस्त होने के बाद पुलिया धंस गई है। इसके चलते मुख्य मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ है और प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद मार्ग की स्थिति को लेकर प्रशासन ने संज्ञान लिया है और पुनर्निर्माण में करीब 30 से 45 दिन लगने की बात सामने आई है।
लेकिन इसी बीच वैकल्पिक मार्ग से भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ भारी वाहन निर्धारित व्यवस्था के बजाय शिव मंदिर, बी-टाइप कॉलोनी, कोरिया नीर प्लांट और फिल्टर प्लांट की ओर से होकर निकल रहे हैं। यदि मुख्य मार्ग पर बैरियर लगाया गया है, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि भारी वाहनों की निगरानी किस तरह की जा रही है और क्या वैकल्पिक मार्ग पर भी उनकी आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है?
बैरियर के बावजूद दूसरे रास्ते से वाहन तो फिर निगरानी व्यवस्था कैसी?
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि थाने के पास बैरियर मौजूद है और प्रशासन को मुख्य मार्ग बंद होने की जानकारी है, तो देर रात भारी वाहन दूसरे रास्ते से कैसे निकल रहे हैं?
क्या रात में इन वाहनों की जांच की गई?
क्या वाहनों का रूट दर्ज किया गया?
क्या परिवहन की अनुमति और गंतव्य की जांच हुई?
क्या वैकल्पिक मार्ग पर भारी वाहनों के लिए कोई स्पष्ट प्रतिबंध या नियंत्रण व्यवस्था लागू है?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
*एक ही रात में कई जगह नुकसान की शिकायत*
स्थानीय लोगों द्वारा यह भी बताया जा रहा है कि भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान बाउंड्री वॉल क्षतिग्रस्त होने, बिजली के पोल के टेढ़े होने, कॉलोनी की सड़क को नुकसान पहुंचने तथा धार्मिक पंडालों में लगी विद्युत झालरों के टूटने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
यदि आबादी वाले क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही इसी तरह जारी रहती है तो सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का है।
कल्पना कीजिए, यदि हाई-वोल्टेज बिजली का तार टूटकर सड़क पर गिर जाता या किसी धार्मिक पंडाल की विद्युत व्यवस्था क्षतिग्रस्त होकर दुर्घटना का कारण बनती, तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यह सवाल स्थानीय लोगों की चिंता के रूप में सामने आ रहा है।
*मामला अब सिर्फ पुलिया तक सीमित नहीं*
मुख्य पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से पैदा हुई यातायात समस्या अब वैकल्पिक रास्तों की सुरक्षा और निगरानी से भी जुड़ गई है। यदि भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया गया है तो यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की क्षमता, अनुमति, रूट और समय की निगरानी हो तथा आबादी वाले हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।
ऐसी परिस्थितियों में अन्य क्षेत्रों में भी प्रशासन द्वारा भारी वाहनों के लिए स्पष्ट डायवर्जन और निगरानी व्यवस्था अपनाए जाने के उदाहरण मिलते हैं।
*प्रशासन और पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग*
स्थानीय लोगों की मांग है कि बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम की जांच करें।
*जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि—*
रात में भारी वाहन किस मार्ग से गुजरे?
उनके लिए वैकल्पिक रूट किसने निर्धारित किया?
*क्या वाहनों के रूट और अनुमति की जांच हुई?*
*बैरियर की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?*
सार्वजनिक सड़क, बाउंड्री वॉल और विद्युत व्यवस्था को हुए नुकसान का वास्तविक कारण क्या है?
यदि नुकसान भारी वाहनों की आवाजाही से हुआ है तो उसकी भरपाई और जिम्मेदारी किसकी होगी?
पुलिया की मरम्मत होने तक सुरक्षित और स्पष्ट यातायात व्यवस्था बनाना जरूरी है, ताकि एक समस्या का समाधान करते हुए दूसरी बड़ी दुर्घटना का खतरा पैदा न हो।



