ब्रह्माकुमारी संचालिका बीके विद्या दीदी, ब्रह्माकुमारी बहनों एवं हेडक्वार्टर मधुबन से आए भाइयों बीके कमल भाई, बीके संजीव भाई, बीके हितेश भाई, बीके दत्ता भाई, बीके दीपक भाई व बीके शैलेंद्र भाई के द्वारा उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें उनकी विशेषताओं व कर्तव्यों के आधार पर याद किया गया। उनका लौकिक नाम राधे था। उनका जन्म 1919 में पंजाब के अमृतसर में एक धनी परिवार में हुआ था ।उनकी आध्यात्मिक यात्रा ओम मंडली सत्संग के दौरान उनकी मुलाकात ब्रह्मा बाबा से हुई 17 वर्ष की छोटी आयु में ही उनके आध्यात्मिक समर्पण और अलौकिक गुणों को देखकर ब्रह्मा बाबा ने उन्हें ईश्वरीय यज्ञ की वारिश बच्ची और बाद में मातेश्वरी मम्मा के रूप में चुना।

मम्मा ज्ञान, प्रेम और त्याग की साक्षात मूर्ति थी। उन्होंने सैंकड़ों भाई-बहनों का अत्यंत वात्सल्य के साथ पालन पोषण किया। वह मुरली की बहुत गहरी ज्ञाता थीं ।आपकी वाणी में अति मधुरता और स्पष्टता थी ।जो हर एक उसे सहज समझकर ग्रहण कर लेता । आप योगनिष्ठ थीं। 24 जून 1965 को उन्होंने अपना भौतिक शरीर का त्याग कर अव्यक्त वतनवासी बन गईं। इसी दौरान भाइयों के द्वारा दो दिवसीय भट्टी कार्यक्रम में सभी भाइयों ने मेडिटेशन के माध्यम से विशेष क्लासेस कराया एवं अपने योगी जीवन के अनुभवों को भाई बहनों के साथ साझा किया।



