पठारीटोला स्कूल के प्राचार्य पर गंभीर आरोप, 50 हजार रुपये ऊपर तक पहुंचाने की बातचीत का दावा; जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच और कार्रवाई की बात कही
राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू कि विशेष रिपोर्ट, दिनांक 25/10/2026
लोकेशन, सूरजपुर छत्तीसगढ़।।
सूरजपुर। जिले के बिहारपुर क्षेत्र में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अवन्तिकापुर के पठारीटोला स्थित शासकीय स्कूल में स्वीपर पद पर नियुक्ति से पहले रिश्वत मांगे जाने के आरोप से जुड़ा एक कथित ऑडियो सामने आने के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। वायरल ऑडियो में स्कूल के प्राचार्य नोखेलाल जायसवाल की आवाज होने का दावा किया जा रहा है। बातचीत में कथित तौर पर 50 हजार रुपये ऊपर के अधिकारियों तक पहुंचाने का जिक्र होने की बात सामने आई है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें सुनाई देने वाली आवाज की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
मामले ने सरकारी स्कूलों में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस पद पर नियुक्ति का उद्देश्य स्कूल में साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर बनाना और बच्चों को सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना था, उसी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कथित लेन-देन की चर्चा सामने आ गई।
*जांच के निर्देश, लेकिन कार्रवाई पर उठ रहे सवाल*
मामले के सामने आने के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गंभीर आरोपों के बावजूद जांच की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी। सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता बनाए रखना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। यदि किसी पद पर नियुक्ति के बदले अवैध राशि मांगने की बात प्रमाणित होती है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि बेरोजगार अभ्यर्थियों के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाएगा।
*जिला शिक्षा अधिकारी ने लिया संज्ञान*
मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा ने संज्ञान लेते हुए कथित ऑडियो की जांच कराने और जांच में तथ्य सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है। अब विभागीय जांच की निष्पक्षता और उसकी समयबद्धता पर सबकी नजरें टिकी हैं।
*ऑडियो की सत्यता और निष्पक्ष जांच जरूरी*
फिलहाल वायरल ऑडियो में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि ऑडियो की तकनीकी जांच कराई जाए, बातचीत में शामिल व्यक्तियों की पहचान की पुष्टि हो और संबंधित प्राचार्य को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। साथ ही, यदि कथित तौर पर ऊपर के अधिकारियों तक राशि पहुंचाने की बात कही गई है, तो जांच में इस दावे की भी स्पष्ट पड़ताल होनी चाहिए। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिक्षा विभाग इस मामले की जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी कर सच्चाई सामने लाएगा, या फिर यह मामला भी विभागीय फाइलों तक सीमित रह जाएगा? क्षेत्र के लोगों की नजरें अब विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।



