राजधानी रिपोर्टर / सौरभ साहू की रिपोर्ट
दिनांक,9/10/2026
लोकेशन: सूरजपुर, छत्तीसगढ़।
सूरजपुर। दिनांक 9 अक्टूबर 2026 जिले के रामानुजनगर विकासखंड अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालयों में कथित तौर पर फर्जी परीक्षा परिणाम और मार्कशीट के आधार पर नौकरी पाने के और आरोपों को लेकर अब जांच और कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भर्ती प्रक्रिया, शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन और विभागीय जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों के नाम कथित फर्जी नियुक्तियों को लेकर सामने आने की बात कही जा रही है, उनके दस्तावेजों की जांच अब तक किस स्तर पर पहुंची है? क्या संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से मार्कशीट का सत्यापन कराया गया है? यदि जांच शुरू हुई है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और निष्कर्ष कब तक सामने आएंगे?
*### आखिर कब होगी मार्कशीट की निष्पक्ष जांच?*
सरकारी नौकरी में शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण आधार होते हैं। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी की मार्कशीट या परीक्षा परिणाम की प्रामाणिकता पर सवाल उठते हैं, तो संबंधित शिक्षा विभाग और नियुक्ति प्राधिकारी की जिम्मेदारी है कि मूल रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन कराया जाए।
जांच के दौरान संबंधित बोर्ड या शैक्षणिक संस्था के रिकॉर्ड, अंकसूची जारी करने का विवरण, परीक्षा परिणाम, नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेज और विभागीय सत्यापन रिपोर्ट का मिलान किया जाना चाहिए। यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
*### जिनके नाम सामने आए, उनकी जांच की स्थिति सार्वजनिक हो*
इस मामले में जनता के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि कथित फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी पाने के आरोपों से जुड़े व्यक्तियों के संबंध में विभाग ने अब तक क्या कदम उठाए हैं? क्या उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का आधिकारिक सत्यापन कराया गया है?
*क्या कोई जांच समिति गठित की गई है? यदि जांच लंबित है, तो उसके पीछे क्या कारण हैं?*
हालांकि, आधिकारिक जांच और प्रमाणित दस्तावेजों के बिना किसी कर्मचारी को फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी पाने वाला घोषित करना उचित नहीं होगा। इसलिए आवश्यक है कि शिक्षा विभाग तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करे और पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करे।
*### शिक्षा विभाग से सीधे सवाल*
– रामानुजनगर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालयों में सामने आए कथित फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच कब शुरू होगी या यदि शुरू हो चुकी है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
– जिन लोगों के नाम इस मामले में सामने आए हैं, उनके दस्तावेजों का सत्यापन किस अधिकारी द्वारा किया जा रहा है?
– नियुक्ति के समय प्रस्तुत मार्कशीट और परीक्षा परिणामों की जांच किस आधार पर की गई थी?
– यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई कब होगी?
– क्या विभाग इस मामले में जांच की स्थिति और निष्कर्षों की जानकारी सार्वजनिक करेगा?
अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। जरूरत इस बात की है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और जांच के निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए। यदि आरोप गलत साबित होते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों को भी अनावश्यक आरोपों से राहत मिलनी चाहिए।
*सवाल साफ है—क्या* रामानुजनगर के इस कथित मार्कशीट प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी, या मामला केवल आरोपों और सवालों तक ही सीमित रह जाएगा? इस मामले में शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष और जांच की वास्तविक स्थिति सामने आना जरूरी है।।



