निरन्तर सरगुजा द्वारा लोकगीतों के कार्यक्रम लोकरंजनी की प्रस्तुति होटल अलंकार ग्रीन में
डॉ पुष्पा सोनी, श्रीमती सन्तोष पाण्डेय, डॉ अपेक्षा सिंह, रंजय स्वर्णकार, रश्मि स्वर्णकार, वरिष्ठ समाजसेवी मंगल पाण्डेय , वरिष्ठ कलाकार श्री रासबिहारी मिश्रा के द्वारा मां सरस्वती एवं गणपति देव के समक्ष दीप प्रज्वलन करके शुभारम्भ किया गया।मीना वर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी सुधिजनों का अभिनंदन करते हुए निरन्तर की संस्थापिका वन्दना दत्ता से सभी अतिथियों का स्वागत करने हेतु एवं स्मृति चिन्ह भेंट करने के लिए अनुरोध किया गया। वन्दना दत्ता ने कार्यक्रम के प्रारम्भ में लोकरंजनी गीतों की प्रस्तुति के उद्देश्य से दर्शकों को अवगत कराते हुए बताया कि प्रस्तुत गीत आकाशवाणी अम्बिकापुर से प्रसारित गीत हैं ।जिसको जिले के प्रसिद्ध गीतकार स्व रामप्यारे रसिक, स्व अनिरुद्ध नीरव, की यादगार रचना है। जिसमें सरगुजा की माटी का सुगंध झलकती है। श्रृंगार रस की रचनाएं भी बहुत ही सुंदर शब्दों में लिखी गई है । किसी भी रचना में फूहड़ता नहीं है ।आज आकाशवाणी के संगीत नियोजक स्व दिलीप सक्सेना, हमारे पारंपरिक गीत के गुरु स्व प्रवीण प्रजापति, स्व राजेन्द्र गुप्ता, आकाशवाणी के उद्घोषक श्री शैलेन्द्र योगी ने सुरों से सजाया था। इन गीतों की मधुरता ने आज हमारी पहचान बनाई है। कार्यकम को शुरु करने से पहले हम उनको प्रणाम करते हैं और गीत की मधुर प्रस्तुति के पहले हमारे वरिष्ठ कलाकार रासबिहारी मिश्रा, मीना वर्मा, मोहर लाल राही, उदघोषिका अर्चना दीक्षित जी परमानंद पातर, संगीत में साथ देने वाले प्रदीप विश्वास, इस्लाम खान, पेड़ वादक और सह गायिका सुप्रिया वर्मा का अभिनंदन करते हुए स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।
सबसे पहले लक्ष्मण मस्तुरिया का गीत छतीसगढ़ वन्दना के रूप में रासबिहारी मिश्रा और साथियों ने,*मैं वंदत हो दिनरात* की मधुर प्रस्तुति दी,नीरव जी की रचना सरगुजा वन्दना के रूप में, *सरगुजा के भुइयां कर माया महतारी असन चल संगी हाय रे* की प्रस्तुति वन्दना दत्ता और साथियों ने की।उद्घोषिका अर्चना दीक्षित जी ने कलाकरों को।लोकगीत गाकर मंच पर आमंत्रित किया सफल संचालन किया, मीना वर्मा जी ने स्वयं की रचना *सरगुजा जिला भारी, एवं चल संगी खेले जबो* कर्मा की प्रस्तुति दी, मोहर लाल रही एव वन्दना दत्ता द्वारा रसिक जी की रचना,* तोला देखे बिना संगी टपकी टपकी चुवे लोर* पर खूब तालियां बटोरी, इसी क्रम में प्रेमानंद पातर जी ने रसिक जी की रचना की प्रस्तुति दी, अतिथि डाक्टर पुष्पा सोनी जी ने सबके आग्रह पर छतीसगढ़ी गीत *नरवा तीर में मोर* की मधुर प्रस्तुति दी, लोकगायिका बबिता विस्वास ने पंडवानी और भरथरी, *घोड़ा रोये घोड़साल मा* और कर्मा गीत*रिमझिम भादो के बरसात में चला कर्मा खेले जाई गीत में दर्शक बहने कर्मा नृत्य करने लगी, मंच पर वन्दना दत्ता के द्वारा स्व प्रवीण प्रजापति के गीत, पानी मारे दलेला उठाये लेबे बाबू ते बड़खा बुंदेला, और रात झिम झिम करे कि भी प्रस्तुति दी। मोहर लाल रही ने भी एकल गायन कर्मा की प्रस्तुति दी। रासबिहारी मिश्रा जी ने सतरंगी करौंदा रषिक जी की रचना से गीत प्रसूत किया, अनिरुद्ध नीरव जी की रचना *पियर पियर गाँव तोला हंकाये रे* रसिक जी की रचना *पैरी के रुनझुन खोपा कर गोंदा फूल* समूह गीत का दर्शकों ने खुद भी साथ मे गाकर आनंद उठाया।इस आयोजन को सफल बनाने में, लेजर हॉस्पिटल से डाक्टर अपेक्षा गहरवार, शास्त्री मोटर्स से श्री सतीश चंद्र मिश्रा जी, श्री रंजय स्वर्णकार, डाक्टर शांतनु सोनी cos Bos का अमूल्य योगदान रहा, अतिथियों ने अपने सम्बोधन में इस तरह के आयोजन को समय समय पर होते रहने का आग्रह किया । कार्यक्रम में श्री विजय गुप्त, गुलाब अग्रवाल ,राजेश पाण्डेय अब्र , कृष्णानंद तिवारी, देवेन्द्र दास सोनवानी जी, अशोक जायसवाल, जयेश वर्मा, रंजन खेर पाण्डेय, पंकज मुंजे, अजय तिवारी, पद्मनाभन शर्मा, अनंगपाल दीक्षित, असीम सेनगुप्ता, एम एस चौदहा, डाक्टर तृप्ति विश्वास, दीपमाला सिंह , हेना सेन, किरण गुप्ता, नेहा वर्मा, सोनी सिन्हा, रेखा इंगोले,पूनम जायसवाल, अलका इंगोले , चेतना मुंजे, अंजना परिहार, मंजू जायसवाल, जानकी सिंह, तनुश्री मिश्रा, सुधा तिवारी, मिलन शर्मा, मधु चौदहा, अनिता शुक्ला , साधना कश्यप, संगीता महापात्र, जयंती एव अन्य संगीत के सुधि जन उपस्थिति थे। अंत मे मीना वर्मा ने समूह के साथ *मोला जवान डे न अलबेला मोर अबड़ बेला होंगे* के साथ सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।



