TET से स्थायी मुक्ति सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 1 से 15 सितंबर तक अभियान,
विधायक-सांसद सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों को सौंपेंगे ज्ञापन
अंबिकापुर, 1 सितंबर 2026
सेवारत शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने की मांग को लेकर शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने प्रांतीय निर्णय अनुसार सरगुजा ने आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। 25 अगस्त को जिला मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित जिला स्तरीय रैली के बाद अब मोर्चा 1 से 15 सितंबर तक प्रदेशव्यापी अभियान के तहत सरगुजा में भी जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों से संपर्क कर ज्ञापन सौंपेगा।
मोर्चा के जिला संचालक कमलेश सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान जिले के विधायक, सांसद, नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों तथा समाज प्रमुखों से मुलाकात कर सेवारत शिक्षकों को TET से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए शासन स्तर पर प्रभावी पहल की मांग की जाएगी।
28 साल की सेवा के बाद फिर परीक्षा पर सवाल
मोर्चा का सबसे बड़ा सवाल सेवारत शिक्षकों को TET के दायरे में लाने को लेकर है। मोर्चा का कहना है कि जो शिक्षक वर्षों से सरकारी सेवा में हैं, जिन्होंने लगातार बच्चों को पढ़ाया है और शिक्षा व्यवस्था में अपना योगदान दिया है, उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा के जरिए अपनी योग्यता साबित करने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।
कमलेश सिंह ने कहा कि, “28 साल तक जिस शिक्षक से सरकार ने बच्चों को पढ़वाया, उसी शिक्षक से आज यह पूछना कि वह पढ़ाने योग्य है या नहीं, शिक्षकों के अनुभव और सेवा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।”
17 अगस्त 2012 से पहले की स्थिति का भी हवाला
मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि 17 अगस्त 2012 तक छत्तीसगढ़ में TET की आवश्यकता नहीं थी। वर्तमान न्यायिक एवं वैधानिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार को इस मामले में ठोस पहल करनी चाहिए।
मोर्चा की मांग है कि सरकार तमिलनाडु की तर्ज पर सेवारत शिक्षकों को TET से राहत देने के लिए आवश्यक विधायी प्रावधान लागू करने की दिशा में पहल करे। साथ ही इस विषय पर विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे जाने की संभावना पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
विभागीय TET का विकल्प भी सुझाया
मोर्चा ने कहा कि यदि परिस्थितियों के कारण TET की आवश्यकता अपरिहार्य मानी जाती है, तो लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए पृथक एवं सीमित विभागीय TET आयोजित की जा सकती है। इसके लिए परीक्षा का स्तर, प्रक्रिया, परीक्षा एजेंसी, पर्याप्त अवसर और तैयारी के लिए समय जैसे विषयों को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
मोर्चा ने यह भी सुझाव दिया है कि NCTE से आवश्यक पत्राचार कर छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अपने सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय TET आयोजित करने के विकल्प पर विचार किया जाए। साथ ही परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी कर शिक्षकों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
पांच सूत्रीय मांगों पर जारी रहेगा संघर्ष
संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे एवं केदार जैन क़े नेतृत्व में शिक्षक संघर्ष मोर्चा द्वारा शिक्षा मंत्री के समक्ष रखी गई पांच प्रमुख मांगों में—
TET के झमेले से स्थायी मुक्ति।
पूर्व सेवा की गणना कर सेवा लाभ प्रदान करना।
केंद्रीय वेतनमान देकर वेतन विसंगति दूर करना।
D.Ed. धारक शिक्षकों के लिए B.Ed. हेतु ब्रिज कोर्स की व्यवस्था।
भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त अथवा आवश्यक संशोधन करना।
मोर्चा का कहना है कि इन सभी विषयों पर शिक्षा मंत्री के साथ सकारात्मक चर्चा हुई है, लेकिन अब आश्वासन से आगे बढ़कर ठोस निर्णय और कार्यवाही की आवश्यकता है।
“संघर्ष रुकेगा नहीं, समाधान तक आवाज उठती रहेगी”
मोर्चा के जिला संचालक कमलेश सिंह, नरेंद्र मिश्रा एवं स्नेह लता पाठक सहित काजेश घोष, रामबिहारी गुप्ता, अनिल तिग्गा,अरविन्द सिंह, अमित सिंह, लव गुप्ता, सुरित राजवाड़े, रोहिताश शर्मा,अजय तिवारी, राजेश सिंह, अरविन्द राठौर, राकेश दुबे, प्रशांत चतुर्वेदी, अमित सोनी, लखन राजवाड़े,राकेश पांडेय, रणबीर सिँह, जवाहर खलखो, सुशील मिश्रा, योअल लकड़ा सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपने सम्मान, सेवा सुरक्षा, अधिकार और भविष्य से जुड़े विषयों पर चुप भी नहीं बैठेंगे।
उन्होंने सरगुजा के सभी शिक्षक साथियों से अपील की कि 1 से 15 सितंबर के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों तक शिक्षक समुदाय की मांगों को मजबूती से पहुंचाएं।
मोर्चा का स्पष्ट संदेश है—“वर्षों की सेवा का सम्मान चाहिए, TET के नाम पर अनिश्चितता नहीं; आश्वासन नहीं, अब समाधान चाहिए।”



