जिला प्रशासन लगातार नशे के खिलाफ अभियान चलाती है, लेकिन सवाल तब उठता है जब शासकीय कर्मचारी ही ड्यूटी के दौरान गुटका चबाते नजर आ रहे है!
बलरामपुर/सरकारी कामों की जांच भी बड़ी दिलचस्प होती है। पहले जिस इंजीनियर साहब ने मुरमीकरण कार्य का मूल्यांकन किया, वही साहब बाद में उसी कार्य की जांच करने वाली टीम में भी नजर आए। मामला जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत नवाडीह कला का है, जहां मुरमीकरण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए शिकायत की थी।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में करीब 4 लाख 70 हजार रुपये के मुरमीकरण कार्य की राशि का आहरण किया गया। आरोप है कि मौके पर महज 10-15 ट्रैक्टर मुरुम डालकर काम पूरा दिखा दिया गया और शेष राशि का कथित रूप से फर्जी तरीके से आहरण कर लिया गया। शिकायत के बाद जब जांच टीम मौके पर पहुंची तो ग्रामीणों को उम्मीद थी कि निष्पक्ष जांच होगी, लेकिन यहां तो कहानी ही कुछ अलग नजर आई।
जिस काम का मूल्यांकन किया, उसी की जांच भी!
ग्रामीणों के मुताबिक संबंधित इंजीनियर तनुज अम्बस्ट ने पहले इसी कार्य का मूल्यांकन किया था और बाद में वे ही जांच समिति के साथ मौके पर जांच करते नजर आए। अब ग्रामीणों का सवाल है कि साहब ने पहले काम को सही माना और अब खुद ही उसी काम की जांच भी कर रहे हैं, तो फिर जांच में नया क्या निकलेगा?
जांच चलती रही, साहब का गुटखा भी चलता रहा!
मौके पर जांच के दौरान एक और नजारा चर्चा का विषय बना रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि इंजीनियर तनुज अम्बस्ट जांच शुरू होने से लेकर समाप्ति तक गुटखा खाते नजर आए। मीडिया ने जांच समाप्त होने के बाद उनसे पूछा कि आखिर साहब क्या खा रहे हैं, लेकिन सवाल का जवाब देने के बजाय वे वाहन में बैठकर वहां से रवाना हो गए।
हस्ताक्षर में भी दिखी ‘जांच की तेजी’!
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान दूसरे पक्ष के लोगों के हस्ताक्षर नहीं कराए गए। जब असंतुष्ट ग्रामीणों ने बाहर जाकर जांच समिति के सदस्यों से कहा कि वे भी अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहते हैं और उनके हस्ताक्षर लिए जाएं, तो मीडिया की मौजूदगी में बाद में उनके हस्ताक्षर लिए गए।
अब सवाल सिर्फ मुरमीकरण कार्य की गुणवत्ता और राशि के आहरण का नहीं है, बल्कि जांच की निष्पक्षता और जांच समिति की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की जांच ऐसे अधिकारी से कराई जाए, जिसका पहले हुए मूल्यांकन से कोई संबंध न हो।
अब देखना यह है कि गुटखा चबाते हुए जांच करने वाले इंजीनियर साहब की कार्यशैली पर विभाग कोई ‘जांच’ बैठाता है या मामला भी बाकी सरकारी जांचों की तरह फाइलों में ही चबता रहता है।



