*NH-43 पर सड़क बनी गौवंश का आश्रय, आखिर कब जागेगी व्यवस्था?***
राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू की विशेष रिपोर्ट,,,
दिनांक 29/07/2026,
लोकेशन, सूरजपुर छत्तीसगढ़।।
सूरजपुर, दिनांक 29 जुलाई 2026 जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग NH-43 की तस्वीरें व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। दिन हो या रात, सड़क के बीचों-बीच बड़ी संख्या में आवारा गौवंश बैठे दिखाई देते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच यह स्थिति न केवल गौवंश के जीवन के लिए खतरा है, बल्कि हजारों वाहन चालकों और यात्रियों की जान भी जोखिम में डाल रही है।
विडंबना यह है कि एक ओर गौ माता को “राष्ट्रमाता” का दर्जा देने की मांग को लेकर बाइक रैली निकाली जा रही है और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यही गौवंश सड़कों पर असुरक्षित हालत में भटकने को मजबूर हैं।
*सवाल सिर्फ दर्जे का नहीं, सुरक्षा का भी है*
यदि गौ माता को सर्वोच्च सम्मान देने की मांग की जा रही है, तो सबसे पहला प्रश्न यह उठता है कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? क्या केवल रैली निकालना और नारे लगाना ही गौ सेवा है, या फिर उनके जीवन की रक्षा के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था करना भी उतना ही आवश्यक है?
हर दिन हादसों का बढ़ता खतरा
NH-43 जैसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के समय सड़क पर बैठे गौवंश किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। कई बार वाहन चालक इन्हें बचाने के प्रयास में स्वयं दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। ऐसे हादसों में न केवल गौवंश की मौत होती है बल्कि निर्दोष लोगों की जान भी चली जाती है।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
*गौशालाएं, कांजी हाउस और गौठान आखिर किसलिए?*
सरकार द्वारा गौ संरक्षण के लिए गौशालाएं, कांजी हाउस और गौठानों जैसी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। लेकिन यदि बड़ी संख्या में गौवंश आज भी सड़कों पर घूम रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन व्यवस्थाओं का संचालन कितना प्रभावी है? क्या इनके रखरखाव और निगरानी की नियमित समीक्षा हो रही है?
*हर जिले में बने गौ संरक्षण समिति*
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक जिले में गौ संरक्षण समिति का गठन कर स्पष्ट जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। नगर पालिका, पंचायत, पशुपालन विभाग और प्रशासन के संयुक्त अभियान से सड़क पर घूम रहे गौवंश को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
*जनता के सवाल*
क्या गौ माता की सुरक्षा केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह जाएगी?
क्या गौ संरक्षण सिर्फ नारों और रैलियों तक सीमित रहेगा?
क्या सड़क पर बैठे इन बेजुबान पशुओं की चिंता किसी बड़े हादसे के बाद ही की जाएगी?
क्या सरकार और प्रशासन स्थायी समाधान की दिशा में कोई सख्त कानून बनाएंगे?
*स्थायी समाधान की जरूरत*
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि गौ संरक्षण को लेकर गंभीरता है, तो सड़कों पर घूम रहे गौवंश के लिए प्रभावी पुनर्वास, गौशालाओं को संसाधन, नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करना आवश्यक है। इससे एक ओर गौवंश की सुरक्षा होगी तो दूसरी ओर सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।
*हमारे समाचार लगाने का उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि आम जनता और प्रशासन को सच्चाई से अवगत कराना।।*
दैनिक राजधानी रिपोर्टर समाचार पत्र छत्तीसगढ़ आप सभी अपील करता है कि यह रिपोर्ट एक गंभीर जनहित मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करती है। और यह हमारा कर्तव्य हैं , न कि किसी उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या संगठन पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि यह सवाल उठाना है कि,,, यदि गौ संरक्षण समाज और शासन दोनों की प्राथमिकता है, तो उसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू—गौवंश की वास्तविक सुरक्षा—भी उतनी ही प्राथमिकता से सुनिश्चित होनी चाहिए। सड़क पर बैठा हर गौवंश केवल एक पशु नहीं, बल्कि मानव जीवन और सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकार, प्रशासन और समाज—तीनों की साझा जिम्मेदारी है कि इसका स्थायी समाधान निकाला जाए।



