राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू कि विशेष रिपोर्ट,,
दिनांक 24/07/2026,,
लोकेशन, अम्बिकापुर जिला सरगुजा छत्तीसगढ़।।
अंबिकापुर। सरगुजा में अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर कैबिनेट मंत्री एवं अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल के सार्वजनिक बयान के महज 24 घंटे के भीतर कोतवाली थाना अंबिकापुर में राजहंस बस के संचालक इरशाद आलम सहित छह लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने का मामला सामने आया है।
एक दिन पूर्व जारी अपने सार्वजनिक वीडियो संदेश में मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट कहा था कि सरगुजा जैसे शांत क्षेत्र में अपराधियों तथा उन्हें संरक्षण देने वालों के विरुद्ध कानून के दायरे में कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अगले ही दिन कोतवाली थाना अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 0510/2026 (दिनांक 23 जुलाई 2026) दर्ज किया गया। दर्ज एफआईआर के अनुसार इरशाद आलम, ज़िसान आलम, दिलशाद आलम, सलमान सहित छह व्यक्तियों पर फरार आरोपी शाबिर आलम एवं उसके पुत्र कामरान साबरी के साथ मिलकर जान से मारने की धमकी देने तथा सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज करने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी है।
*पूर्व में भी दर्ज हो चुके हैं कई प्रकरण*
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संबंधित व्यक्तियों से जुड़े मामलों में पूर्व में भी कोतवाली अंबिकापुर में विभिन्न अपराध दर्ज किए जा चुके हैं।
*अपराध क्रमांक* 151/2024 (16 मार्च 2024) में शाबिर आलम के विरुद्ध धारा 294, 323, 506 एवं 34 भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज हुआ था।
*अपराध क्रमांक* 0505/2025 (26 जुलाई 2025) में कामरान साबरी, सलमान उर्फ करिया एवं सोनू के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई थी। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2024 के प्रकरण में पुलिस सक्षम न्यायालय में चालान भी प्रस्तुत कर चुकी है।
*पृष्ठभूमि: गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल*
29 जून 2026 को विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी सामने आई थी कि झारखंड के चर्चित गैंगवार से जुड़े कुछ दोषसिद्ध और फरार आरोपी पिछले कई वर्षों से अंबिकापुर क्षेत्र में रहने की बात सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने राजहंस बस संचालक बैदुल ख़ान के विरुद्ध कथित रूप से फरार आरोपियों को शरण देने के आरोप में अपराध क्रमांक 454/2026 (05 जुलाई 2026) दर्ज किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले में जांच जारी है।
*बयानों के बाद नया घटनाक्रम चर्चा में*
एफआईआर दर्ज होने से पहले विभिन्न मीडिया मंचों और सोशल मीडिया पर इरशाद आलम सार्वजनिक रूप से यह दावा करते रहे थे कि बैदुल ख़ान का कथित गैंगस्टरों से कोई संबंध नहीं है तथा उन्होंने प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग भी की थी।
*अब ताज़ा घटनाक्रम में* इरशाद आलम स्वयं अपराध क्रमांक 0510/2026 में सह-आरोपी के रूप में नामजद किए गए हैं। मामले की जांच जारी है और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
*पारिवारिक संबंधों को लेकर भी चर्चाएं*
शहर में लंबे समय से बैदुल ख़ान, जावेद आलम उर्फ बाबू और इरशाद आलम के बीच पारिवारिक संबंध होने की चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ऐसे सभी विषय जांच एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होंगे।
*जांच पर पुलिस की नजर, आगे भी हो सकती है कार्रवाई*
सूत्रों के अनुसार सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। विवेचना के दौरान यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
*मंत्री की अपील: जांच पूरी होने तक संयम बरतें*
कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने भी अपने सार्वजनिक बयान में कहा है कि प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसी सूचनाओं के प्रसार से बचना चाहिए, जिनसे पुलिस विवेचना प्रभावित हो सकती है। कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने कानून और शासन पर भरोसा जताते हुए कहा कि दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी, वहीं जांच पूरी होने तक केवल तथ्यात्मक एवं प्रमाणित जानकारी ही सार्वजनिक की जानी चाहिए।।



