अम्बिकापुर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 12 वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ऑन? स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया, जिसने देशभर के लाखों बच्चों के शैक्षणिक भविष्य अस्त-व्यस्त हो गया है। कक्षा 12 का पास परसेंटेज अभूतपूर्व रूप से 3% अंक गिर गया है (88% से घटकर 85%) और पूरी प्रक्रिया अनियमितताओं से भरी रही है-धुंधली और अपठनीय उत्तर पुस्तिकाएं, गलत मूल्यांकन, छात्रों के साथ गलत उत्तर पुस्तिकाओं का जोड़ा जाना, भुगतान में देरी, और छात्रों से अत्यधिक पुनर्मूल्यांकन शुल्क की मांग।
अब शिक्षा मंत्री, जो पूरी संस्थागत व्यवस्था के पतन की अगुवाई कर रहे हैं, इस त्रासदी के सामने आने के एक सप्ताह से अधिक समय बाद आखिरकार जागे हैं। वे अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर को इन तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए शामिल कर खुद को किसी उद्धारकर्ता की तरह पेश कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि इन समस्याओं का पहले अनुमान क्यों नहीं लगाया गया? ऑनलाइन सिस्टम मार्किंग प्रणाली को अपनाने से पहले सी बी एस ई और मंत्रालय ने सावधानीपूर्वक योजना क्यों नहीं बनाई? इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में मंत्री को इतना समय क्यों लगा?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर देश का उनका इस्तीफा बकाया है और प्रधानमंत्री जी पर यह जवाब बकाया है कि आखिर इन मंत्री जी को-जो अपनी अक्षमता से खुले तौर पर भारत के छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं-इतनी लंबी अवधि तक पद पर बने रहने की अनुमति क्यों दी गई।
परवेज़ आलम गांधी
प्रदेश महासचिव
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी,अल्पसंख्यक विभाग



