नगर निगम अंबिकापुर द्वारा संचालित आश्रय स्थल, नया बस स्टैंड अंबिकापुर के संचालन एवं वित्तीय प्रबंधन से संबंधित गंभीर अनियमितताओं की जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों एवं सूचनाओं से प्राप्त हुई है। उपलब्ध तथ्यों से प्रतीत होता है कि आश्रय स्थल के संचालन में शासन द्वारा निर्धारित नियमों, प्रक्रियाओं एवं वित्तीय प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आश्रय स्थल की प्रभारी श्रीमती निशा सिंह, सिटी मिशन मैनेजर, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM), अंबिकापुर तथा संचालिका श्रीमती ललिता पांडे द्वारा आश्रय स्थल के संचालन में गंभीर अनियमितताएं एवं मनमानी बरती जा रही हैं। जबकी महोदय अवगत हो कि आश्रय स्थल के संचालन की मॉनिटरिंग माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जाती है इसके बाद भी इनके द्वारा मनमानी की जा रही है जानकारी के अनुसार विगत कई वर्षों से आश्रय स्थल से प्राप्त होने वाली आय को शासन द्वारा निर्धारित खाते में नियमित रूप से जमा नहीं किया गया है, जिससे शासन को आर्थिक क्षति पहुंचने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
इसके अतिरिक्त यह भी ज्ञात हुआ है कि आश्रय स्थल के संचालन हेतु निर्धारित अवधि समाप्त होने के पश्चात भी बिना विधिवत निविदा (टेंडर) आमंत्रित किए एक ही महिला स्व-सहायता समूह को संचालन का कार्य निरंतर सौंपा गया है। यह व्यवस्था पारदर्शी निविदा प्रक्रिया एवं शासन के नियमों के विपरीत प्रतीत होती है। यदि बिना सक्षम स्वीकृति एवं वैधानिक प्रक्रिया के संचालन अवधि बढ़ाई गई है, तो यह गंभीर प्रशासनिक अनियमितता का विषय है।
साथ ही, आश्रय स्थल में कार्यरत कर्मचारियों के मासिक मानदेय/वेतन भुगतान संबंधी बैंक विवरण, भुगतान रजिस्टर एवं अन्य वित्तीय अभिलेखों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे वित्तीय पारदर्शिता, लेखा-जोखा एवं व्यय की वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं तथा वित्तीय अनियमितता की आशंका उत्पन्न होती है।
यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि आश्रय स्थल प्रबंधन समिति की विधिवत बैठक, प्रस्ताव अथवा स्वीकृति के बिना ही संचालन अवधि को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है। यदि ऐसा किया गया है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं एवं शासन के निर्धारित नियमों का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होता है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि उपरोक्त समस्त बिंदुओं की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच के दौरान आश्रय स्थल की आय-व्यय, बैंक खातों, निविदा प्रक्रिया, संचालन अवधि विस्तार, कर्मचारियों के भुगतान अभिलेख तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाए।
यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी, अनियमितता अथवा शासन के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो शासन को हुई आर्थिक क्षति की वसूली करते हुए दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक एवं वैधानिक कार्यवाही की जाए। साथ ही आश्रय स्थल के संचालन हेतु अन्य पात्र एवं योग्य महिला स्व-सहायता समूहों को भी निष्पक्ष एवं पारदर्शी अवसर प्रदान किया जाए।
आशा है कि जनहित एवं वित्तीय पारदर्शिता को दृष्टिगत रखते हुए इस प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करेंगे।
परवेज़ आलम गांधी
अंबिकापुर, जिला सरगुजा (छ.ग.)



