अंबिकापुर में अवैध स्कूल और शिक्षा विभाग की मिलीभगत अब नहीं चलेगी।
इस स्कूल की फीस प्रति छात्र लगभग ₹1 लाख सालाना (₹8000 मासिक + किताब, कॉपी, ड्रेस, बैग, बोतल)। करीब 200 बच्चे—यानी हर साल लगभग ₹2 करोड़ की वसूली। और कार्रवाई? सिर्फ ₹1 लाख का जुर्माना! ये न्याय नहीं, मज़ाक है।
शहर के हृदय स्थल में सालों से अवैध संचालन—और शिक्षा विभाग को खबर तक नहीं? ये पचने वाली बात नहीं। जितना दोषी शाला प्रबंधन, उतना ही DEO सरगुजा।
यदि विद्यालय अवैध है तो 3 साल में वसूली गई पूरी फीस वापस होनी चाहिए।
बिना फूड विभाग की अनुमति बच्चों को रोज भोजन कराना—ये भी अपराध है।
दोषी संचालक और DEO पर FIR की मांग को लेकर थाना में आवेदन दिया गया है। अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करेगा, तो अब सीधा कोर्ट का रास्ता—और दोषियों को जेल भेजा जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में एक संगठित अपराध चल रहा है—फीस, ड्रेस, कॉपी-किताब के नाम पर खुली लूट मची हुई है। CBSE स्कूलों में NCERT नियमों का पालन नहीं, हर साल नई किताबों की मजबूरी।
पालक एक अदृश्य भय में जी रहे हैं—अपनी नन्ही सी जान के भविष्य की चिंता में बोल नहीं पाते।
आज क्लास 1 की फीस उतनी हो गई है, जितने में 10 साल पहले 3 साल की इंजीनियरिंग या मेडिकल हो जाती है।



