बलरामपुर/जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर पिछले कुछ समय में बदलाव देखने को मिल रहा है। पूर्व में कार्यालयीन कार्यों के लिए लोगों को इधर-उधर भटकने तथा विलंब होने की शिकायतें सामने आती रही थीं। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव की पदस्थापना के बाद कार्यालय में सीधे संवाद और त्वरित निराकरण की व्यवस्था को बढ़ावा मिलने की बात सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि अब शिक्षक, कर्मचारी और आम लोग अपनी समस्याओं को लेकर सीधे जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर रहे हैं। कई मामलों में संबंधितों की समस्याओं को सुनकर अधिकारियों द्वारा तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। इससे लोगों को कार्यालयीन कार्यों के लिए किसी तीसरे व्यक्ति पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।
कार्यालय में सीधे संवाद की व्यवस्था मजबूत होने से कथित बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो गई है। यही वजह है कि कार्यालयीन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने की चर्चा के बीच कुछ लोगों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह की बातें किए जाने की चर्चा भी है। हालांकि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि किसी भी अधिकारी की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि आम शिक्षक, कर्मचारी और नागरिकों की समस्याओं का समाधान कितनी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से हो रहा है। यदि कोई व्यक्ति बिना किसी माध्यम के सीधे अधिकारी तक अपनी बात पहुंचा पा रहा है और उसे समय पर समाधान मिल रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
वर्तमान में जिला शिक्षा कार्यालय में सीधे संवाद और शिकायतों के त्वरित निराकरण की प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच सकारात्मक चर्चा है।



