अम्बिकापुर। प्रधानमंत्री द्वारा देश के युवाओं के लिए ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर जिला कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग सरगुजा के अध्यक्ष रशीद अहमद अंसारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि युवा पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं, रोजगार की मांग करते हैं या व्यवस्था में सुधार की बात करते हैं, तो क्या उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहा जाएगा?
रशीद अहमद अंसारी ने कहा कि जो विद्यार्थी अपने स्कूलों में बेहतर भवन, शिक्षक, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, क्या वे मासूम बच्चे भी ‘दिमागी नक्सल’ हैं? देश का युवा और विद्यार्थी देश का भविष्य है, उसे बदनाम करने के बजाय उसकी बात सुनी जानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि असली चिंता उन ताकतों से होनी चाहिए जो धर्म और जाति के नाम पर समाज में नफरत फैलाती हैं, हिंदू-मुस्लिम और दलित सहित विभिन्न वर्गों के बीच भेदभाव पैदा करती हैं तथा सदियों से चली आ रही भाईचारे की डोर को तोड़ने का काम करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता, गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे में है। देश को बांटने वाली भाषा और नफरत की राजनीति के बजाय आज जरूरत है कि सरकार युवाओं को रोजगार, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए।
रशीद अहमद अंसारी ने कहा, “देशभक्ति का मतलब सवालों से डरना नहीं, बल्कि सवालों का जवाब देना है। जो युवा अपने अधिकारों और देश के बेहतर भविष्य के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ जैसे तमगों से नवाज़ने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वाले नहीं, बल्कि देश को जोड़ने वाले विचारों की जरूरत है। भारत को विभाजन नहीं, भाईचारा चाहिए; युवाओं को लेबल नहीं, रोजगार और सम्मान चाहिए।
जारीकर्ता:
रशीद अहमद अंसारी
अध्यक्ष
जिला कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग, सरगुजा
अम्बिकापुर



