अंबिकापुर ब्रह्माकुमारी संस्था में सप्त दिवसीय श्रीमद भगवत गीता ज्ञान का पांचवें दिन में *भारत का उत्थान और पतन एवं फिर से स्वर्णिम भारत कैसे बने?*
इस विषय पर *योग शक्ति गीता दीदी जी* ने बताया कि भारत भूमि को प्राचीन समय में सोने की चिड़िया कहा जाता थाl गीता में वर्णित श्लोक है- कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
कर्म ऐसा हो जहां निष्काम भाव से कर्म होl विश्व कल्याण अर्थ कर्म होl राग- द्वेष रहित होकर कर्म होl कर्तापन के अभाव से कर्म होl उन्होंने आगे कहा
सतयुग में सुख ,शांति, समृद्धि ,पवित्रता, का राज्य थाl
सतयुग में आत्माएं पूर्ण पवित्र, गुणवान और योगयुक्त थे, तब भारत में हर तरफ खुशहाली थीl ना रोग था, ना शोक था, ना युद्ध थाl प्रकृति भी सहयोगी थीl धंन- धान्य से भरपूर राज्य थाl यही भारत का सर्वोच्च उत्थान थाl इस समय लक्ष्मी- नारायण का राज्य चलता था दिव्यता से सजे सजाऎ थेl समय चक्र आगे बढ़ा, आत्माओं की शक्तियां थोड़ी कम होने लगीl पवित्रता का बल घटा, इसलिए सतयुग के देवता अगले जन्म में राम सीता के रूप में त्रेतायुग में आएl आत्मा की कला थोड़ा कम हो गयी तो सिल्वर एज कहलाएl

द्वापर और कलयुग में आत्मा देह -अभिमान में आई, काम क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, बढ़ने लगाl इसको ही भगवत गीता में बताया गया है- श्री कृष्ण को पांच फन वाला कालिया नाग ने डसा और सुंदर से श्याम हो गए।भारत में अनेक धर्म आए, लड़ाइयां हुई, शांति समाप्त हुईl सोने की चिड़िया कहलाने वाला भारत गरीब और दुखी बनने लगाl यही भारत जो विश्वगुरु था, आज संघर्षों से गुजर रहा हैl
और इसी अति के अंत घड़ी में स्वयं परमपिता परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा के तन में आकर गीता ज्ञान देकर साधारण मनुष्य को देवतुल्य लक्ष्मी- नारायण बनाते हैंl

इस कार्यक्रम मे मुख्य रूप से महामंत्री प्रदेश कांग्रेस छत्तीसगढ़ एवं संरक्षण ब्राह्मण सर्व समाज देवेंद्र मिश्रा जी, सभापति हरमिंदर सिंह जी, अध्यक्ष भारतेंदु साहित्य एवं कला समिति नीलिमा मिश्रा, मंडल अध्यक्ष मनोज कंसारी , अनिल तिवारी, सरगुजा संभाग संचालीका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी जी, उपस्थित रहेl कार्यक्रम का शुभारंभ योग शक्ति गीता दीदी का अतिथियों द्वारा स्वागत सम्मान, देव पूजन एवं दीप प्रज्वलन कर किया गयाl
श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, पूरा पंडाल भगवत प्रेम से गूंज उठाl
इस कार्यक्रम का समापन दिनांक 18 अप्रैल को होगाl



