कार्यक्रम में अतिथि के रूप में रामकृष्ण आश्रम के सचिव स्वामी तन्मयानन्द जी, वरिष्ठ समाजसेविका वंदना दत्ता एवं ऋचा बहन उपस्थित रहीं। तत्पश्चात् योग शक्ति गीता दीदी जी का स्वागत स्वामी तन्मयानंद जी ने शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ से किया गया l सरगुजा संभाग की संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने भगवत गीता का महत्व बताते हुए कहा की अभी सतयुग दुनिया का स्थापना हो रहा है ।और हमें उस सतयुगी दुनिया में जाने के लिए हमें आत्मशुद्धि करना पड़ेगा। आत्मशुद्धि करेंगें तभी उस पवित्र दुनिया में जा सकते हैं। रामकृष्ण आश्रम के सचिव स्वामी तन्मयानन्द जी ने कहा कि भगवत गीता की एक- एक बातें अमृत समान है। गीता अपने आप में एक महान ग्रन्थ है।

सिवनी मध्य प्रदेश से आई हुई योग शक्ति मुख्य वक्ता *गीता दीदी* ने छठवें दिन बताया कि मोह जाल में बंधे अर्जुन को भी साक्षात्कार के माध्यम से ही नाष्टोमोहा बनने का ज्ञान मिला। उन्होंने आगे गीता ज्ञान को स्पष्ट करते हुए बताया कि युद्ध का मतलब ये नहीं होता है कि किसी व्यक्ति विशेष को मारा जाये। परन्तु इसका मतलब है कि अपने अंदर छुपे बुराइयों को मारा जाय। अथार्त उसे समाप्त किया जाय।

समय चक्र के गहरे राज से श्रीमद् भगवत गीता के द्वारा खुला कलयुग से सतयुग का रहस्य- जब-जब धर्म की अति ग्लानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब परमात्मा स्वयं अवतरित होते हैंl कलयुग के अंत में जब पांच विकार काम, क्रोध ,लोभ, अहंकार, चरम सीमा पर पहुंच जाते हैं, पापाचार बढ़ जाता है, तब परमात्मा को आना ही पड़ता हैl और परमात्मा को “साधुओं की रक्षा, असुरों के विनाश और धर्म की पुनः स्थापना के लिए आना पड़ता हैl आगे उन्होंने कलयुग के अंतिम दृश्य का वर्णन करते हुए कहा कि जब रिश्तो में स्वार्थ, भ्रष्टाचार, अधर्म की वृद्धि झूठ ,हिंसा, व्याभिचार को प्रगति का मार्ग समझने लगे तब समझ जाना कलयुग का अंत समय हैl
रामायण के अनुसार हर एक को दशरथ बनने की जरूरत है ।दस इंद्रियों पर शासन करना जब सीख जाएंगे ,जब हर इंद्रियां आत्मा राजा का आज्ञा जिस दिन स्वीकार कर लेगीं उसी दिन रामराज्य की पुनः स्थापना हो जाएगीl



