देश का युवा आज गहरे दर्द, निराशा और असुरक्षा के दौर से गुजर रहा है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और भर्ती-परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से आहत होकर कई छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या जैसा दुखद कदम उठाया। लखीमपुर खीरी के रितिक मिश्रा, दिल्ली की 20 वर्षीय अंशिका पांडेय, राजस्थान के झुंझुनूं के प्रदीप मेघवाल तथा गोवा में रह रहे बेंगलुरु के एक छात्र की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है।
इन बच्चों ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। किसी ने परिवार की उम्मीदों के लिए अपनी खुशियां त्याग दीं, तो किसी ने वर्षों तक कठिन मेहनत की। लेकिन लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों और अविश्वसनीय व्यवस्था ने युवाओं के विश्वास को तोड़ दिया है। आज देश का युवा सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि एक असुरक्षित और अव्यवस्थित सिस्टम से लड़ रहा है।
देशभर में पिछले कुछ वर्षों में कई पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामले सामने आए हैं, जिनसे करोड़ों छात्र-छात्राएं और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। बेरोज़गारी पहले से ही युवाओं के भविष्य पर भारी पड़ रही है, ऊपर से परीक्षा व्यवस्था में बार-बार हो रही गड़बड़ियां उनकी मेहनत और सपनों पर गंभीर चोट कर रही हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई मामलों में जवाबदेही तय होती दिखाई नहीं देती। यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तो युवाओं का भरोसा लगातार कमजोर होता जाएगा। यही कारण है कि हर वर्ष छात्रों में तनाव, अवसाद और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।
प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को इस विषय पर गंभीरता से सामने आना चाहिए। अब तो दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन द्वारा भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर चिंता व्यक्त की गई है। यह स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है और इसे केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय संकट मानकर देखा जाना चाहिए।
हमारी मांगें:
* केंद्रीय शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
* पेपर लीक और परीक्षा धांधली के सभी मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो।
* दोषियों को कठोर सज़ा दी जाए।
* छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा सुरक्षा के लिए ठोस राष्ट्रीय नीति बनाई जाए।
परवेज़ आलम गांधी
प्रदेश महासचिव
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग



