अंबिकापुर। नगर निगम का बजट वित्तीय वर्ष खत्म होने के 15 दिन बाद भी सामान्य सभा मे प्रस्तुत न जाने पर नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे घोर लापरवाही और प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कहा कि यह देरी बताती है कि नगर सरकार के पास शहर के विकास को लेकर कोई स्पष्ट विजन ही नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि बजट केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की दिशा तय करने वाला रोडमैप होता है। इसमें पक्ष और विपक्ष के सभी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से विकास की प्राथमिकताएं तय होती हैं। लेकिन इस बार बजट में हुई देरी यह संकेत देती है कि इस सरकार के पास न तो कोई ठोस योजना है और न ही शहर के विकास को लेकर गंभीरता।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की सरकार जनता और पार्षदों—दोनों की उपेक्षा कर रही है। पार्षदों को अपने-अपने वार्ड की समस्याएं रखने और उनके समाधान के लिए मंच तक नहीं मिल रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खुला अन्याय है।
नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि हर दो महीने में सामान्य सभा की बैठक अनिवार्य है, लेकिन इस नियम को लगातार दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछली बैठक 16 अक्टूबर 2025 को कांग्रेस के कड़े विरोध के बाद करीब चार महीने की देरी से बुलाई गई थी, और अब छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद फिर से बैठक नहीं बुलाई गई है।
उन्होंने महापौर से सीधा सवाल किया कि क्या अब नगर निगम में लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं केवल विपक्ष के दबाव में ही चलेंगी.. ? क्या बिना विरोध के प्रशासन अपनी जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम नहीं है..?
शफी अहमद ने कहा कि सामान्य सभा ही वह मंच है, जहां पार्षद अपने वार्ड की सड़क, बिजली, पानी, आंगनवाड़ी, सफाई और राशन वितरण जैसी बुनियादी समस्याओं को मजबूती से रखते हैं और अधिकारियों पर जवाबदेही तय होती है। लेकिन बैठक न होने से न तो समस्याएं उचित फोरम पर उठ पा रही हैं और न ही उनका समाधान हो पा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन जानबूझकर पार्षदो के अधिकारों को कुचल रहा है, जिससे जनप्रतिनिधियों और आम जनता दोनों में भारी असंतोष और निराशा का माहौल बन गया है।
अंत में उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर सामान्य सभा की बैठक नहीं बुलाई गई, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।



