कांग्रेस की UPA सरकार के दौरान प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह एवं UPA चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से RTI लागू किया गया। RTI ने नागरिकों को मजबूत किया एवं भ्रष्टाचार के कई मामले सामने भी आए।
RTI अपने आप में एक विशेष प्रकृति का कानून था जिसकी प्रशंसा पूरे विश्व में हुई। इस कानून ने देश के नागरिकों को सरकारी सूचनाओं की आसानी से प्राप्ति का अधिकार दिया। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी।
यह बेहद चिंताजनक है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में RTI को लगातार कमजोर किया गया है। 2019 में सूचना आयुक्त की शक्तियां कम की गईं। वर्तमान में केन्द्रीय सूचना आयोग में प्रमुख सूचना आयुक्त समेत 9 पद रिक्त हैं एवं केवल 2 सूचना आयुक्त नियुक्त हैं। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम के नाम पर RTI में जानकारी छिपाई जा रही हैं।
RTI की मजबूती देश के नागरिकों के अधिकारों की मजबूती एवं सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता में बढ़ोत्तरी है। मोदी सरकार निहित स्वार्थों के कारण RTI को धीरे-धीरे खत्म करने का प्रयास कर रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
परवेज़ आलम गांधी
प्रदेश महासचिव
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी,अल्पसंख्यक विभाग



