*छत्तीसगढ़ के छात्रों का भविष्य और मानस खतरे में! स्कूलों में क्रूरता से बाल मन में बैठा ‘डर*
*आज़ाद सेवा संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा: ‘शोषण से शिक्षा का अधिकार और बाल मनोविज्ञान का हनन’*
जारी तिथि: 1 दिसंबर, 2025
स्थान: अंबिकापुर
अंबिकापुर: आज़ाद सेवा संघ छत्तीसगढ़ ने छत्तीसगढ़ के शिक्षण संस्थानों में बच्चों के प्रति हो रहे अमानवीय शारीरिक दंड, क्रूरता और गंभीर यौन शोषण की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। संघ ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि ऐसी घटनाएँ न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं और उनके मन में स्कूल के प्रति एक गहरा डर पैदा कर रही हैं।
आजाद सेवा संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव, श्री रचित मिश्रा, ने माननीय मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में कहा है कि, “इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि स्कूल अब ज्ञान के मंदिर नहीं, बल्कि बाल मन को आघात पहुँचाने वाले स्थान बन रहे हैं। यह स्थिति शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 17 और POCSO अधिनियम के मूल उद्देश्यों को विफल करती है।”
I. भविष्य के साथ खिलवाड़: छात्रों के मन में बैठा ‘डर’
श्री मिश्रा ने ज़ोर देकर कहा कि लगातार होने वाली हिंसा और उत्पीड़न से बच्चे गंभीर मानसिक आघात से गुज़र रहे हैं, जिसका उनके शैक्षिक प्रदर्शन और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
“जब एक मासूम को स्कूल में रस्सी से बांधकर लटकाया जाता है, या प्राचार्य पर यौन शोषण का आरोप लगने के बाद छात्रा आत्महत्या कर लेती है, तो लाखों अन्य छात्रों के मन में स्कूल जाने को लेकर गहरा डर (Phobia) बैठ जाता है। यह उनके शैक्षिक विकास, आत्मविश्वास और निर्भीक होकर सवाल पूछने की क्षमता को स्थायी रूप से नष्ट कर रहा है।”
संघ ने निम्नलिखित प्रमुख घटनाओं का उल्लेख किया है, जो इस खतरे को दर्शाती हैं:
▶️ यौन शोषण से आत्महत्या (गंभीरतम): स्कूल प्राचार्य पर यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद एक नाबालिग छात्रा ने आत्महत्या कर ली—यह बताता है कि शिक्षण संस्थान कितने असुरक्षित हो चुके हैं।
▶️ सूरजपुर: गृहकार्य न करने पर KG-2 के मासूम छात्र को घंटों पेड़ से लटकाया गया, जो बाल मनोविज्ञान पर अमिट आघात है।
बलरामपुर: शिक्षक की बेरहमी से पिटाई के कारण 7 वर्षीय छात्र की आँख में खून का थक्का जम गया।
▶️ दुर्ग/भिलाई: नर्सरी की बच्ची के मुँह पर शर्मनाक तरीके से टेप लगाना मानसिक उत्पीड़न की पराकाष्ठा है।
II. आज़ाद सेवा संघ की चार-सूत्रीय निर्णायक माँग
आससे ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने हेतु मुख्यमंत्री से निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल और कठोर कार्रवाई की अपील की है:
▶️ दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई एवं सेवा समाप्ति: उपर्युक्त सभी गंभीर अपराधों में संलिप्त शिक्षकों/कर्मचारियों पर बिना किसी दया के सेवा समाप्ति की जाए। साथ ही, POCSO अधिनियम के तहत तत्काल आपराधिक मामला दर्ज कर कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
▶️’शून्य सहनशीलता’ नीति की घोषणा: पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में शारीरिक एवं मानसिक दंड के विरुद्ध ‘शून्य सहनशीलता (Zero-Tolerance)’ की नीति को सरकारी आदेश के माध्यम से युद्धस्तर पर लागू किया जाए।
▶️सुरक्षित, गोपनीय शिकायत तंत्र: सभी स्कूलों में POCSO अधिनियम के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन हो, और नाबालिग छात्राओं/छात्रों की सुरक्षा हेतु एक विश्वसनीय, गोपनीय तथा गुमनाम शिकायत निवारण तंत्र (Anonymous Grievance Mechanism) तुरंत स्थापित किया जाए।
▶️अनिवार्य शिक्षक संवेदीकरण: सभी शिक्षकों के लिए बाल-मनोविज्ञान, सकारात्मक अनुशासन तकनीकों, और बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार पर अनिवार्य एवं नियमित प्रशिक्षण (Mandatory Sensitization) की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों के मन का डर खत्म हो सके।


संघ ने अंत में कहा है कि,”छत्तीसगढ़ का भविष्य हमारे छात्रों में निहित है। हम आशा करते हैं कि सरकार तत्काल कदम उठाकर स्कूलों को भयमुक्त और सुरक्षित स्थान बनाएगी।”



