किसान, मजदूर, युवा, महिला और मिडिल क्लास के लिए इसमें कुछ भी नहीं है। बजट में किसान शब्द का उल्लेख भी नहीं है। सरकार चाहती तो किसानों की सहायता राशि को दुगना कर 12000 कर सकती थी। मनरेगा पर कुठाराघात कर मजदूरों के हित को पहले ही कुचला जा चुका है। युवाओं के लिए बजट में न तो रोजगार है, न ही बेरोजगारी भत्ता, बजट के पहले परास्तही गैस की कीमतों में बढ़ोतरी कर महिलाओं के रसोई का बजट बिगड़ा जा चुका है। वह मिडिल क्लास जो कर में सर्वाधिक योगदान करता उंसे टैक्स में कोई छूट मिली है। कुल मिलाकर निर्मला सीतारमण के द्वारा प्रस्तुत 9 वां बजट बेहद निराशाजनक है
बालकृष्ण पाठक
अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी, सरगुजा



