भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री बी. आर. गवई साहब पर एक वकील द्वारा जूता फेंकने की कोशिश करना बेहद शर्मनाक और गंभीर घटना है। CJI सिर्फ़ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था का सर्वोच्च चेहरा हैं।
ऐसी हरकतें दिखाती हैं कि कुछ लोग आज भी न भारतीयता समझ पाए हैं और न ही संविधान की गरिमा। मतभेद होना स्वाभाविक है, पर हिंसा कभी भी स्वीकार नहीं की जा सकती। हमें याद रखना चाहिए कि किसी पद या संस्था का एहतराम करना हर शहरी की ज़िम्मेदारी है।
विचारों में इख़्तिलाफ सिर्फ शब्दों और संवैधानिक तरीक़ों से ही जताई जानी चाहिए। माननीय न्यायाधीश ने जिस शांति और धैर्य से इस घटना का सामना किया, वह उनके मज़बूत और संतुलित स्वभाव को दर्शाता है।
बार काउंसिल को चाहिए कि ऐसे वकीलों पर सख़्त कार्रवाई करे ताकि आइंदा कोई भी न्यायालय की मर्यादा भंग करने की हिम्मत न कर सके। प्रशासन को भी पूरी सख़्ती दिखानी चाहिए।



