महँगाई, बेरोज़गारी, असमानता और किसानों की बदहाली पर कोई ठोस योजना नहीं है। यह बजट नहीं, बल्कि सत्ता की असफलता का प्रमाण है।
बजट में एक बार फिर देश की विशाल आबादी को प्रभावित करने वाले दो सबसे गंभीर मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहा है—तेज़ी से बढ़ती ‘आय की असमानता’ और ‘भयावह बेरोज़गारी’।
इन संरचनात्मक संकटों से जूझने के बजाय बजट ने सतही उपायों और भारी-भरकम शब्दावली का सहारा लिया है। शब्दों की यह सजावट एकाध दिन की सुर्ख़ियाँ तो बना सकती है, लेकिन आम लोगों की आर्थिक वास्तविकताओं/चिंताओं में कोई बदलाव नहीं ला सकती।
बजट में केंद्रीय कृषि मंत्री होने के बावजूद शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के लिए क्या किया?
जनता को सच्चाई नहीं नंबरों का जादू दिखाया जा रहा है।
सिर्फ आंकड़ों का बजट है इसमें गरीब, किसान, महिलाओं, युवाओं, मुसलमानों सहित अल्पसंख्यको और आम आदमी को निराशा मिली है।
परवेज़ आलम गांधी
प्रदेश महासचिव
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी,अल्पसंख्यक विभाग



