बिहार में एक सरकारी समारोह के दौरान नियुक्ति पत्र वितरण के समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब खींचे जाने की घटना अत्यंत शर्मनाक, निंदनीय और अस्वीकार्य है।संविधान की शपथ लेने वाला एक मुख्यमंत्री यदि सार्वजनिक मंच से किसी महिला की गरिमा, सम्मान और धार्मिक पहचान से इस तरह खिलवाड़ करता है, तो यह केवल असंवेदनशीलता नहीं बल्कि एक गंभीर नैतिक और संवैधानिक अपराध है।
हिजाब केवल कपड़ा नहीं, बल्कि उस महिला की पहचान, आस्था और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उसे जबरन हटाने की कोशिश करना एक महिला की इज्ज़त और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह घटना राज्य के मुखिया द्वारा की गई। जब मुख्यमंत्री ही ऐसा आचरण करें, तो राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालात इतने शर्मनाक हो गए कि सुरक्षाकर्मी को हस्तक्षेप कर उस महिला को पीछे खींचना पड़ा, ताकि मुख्यमंत्री की इस आपत्तिजनक हरकत का तमाशा और न बढ़े।
नीतीश कुमार को बिना किसी शर्त के सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।यह सिर्फ़ एक महिला का अपमान नहीं, बल्कि महिला सम्मान, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादाओं पर सीधा प्रहार है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर और घटिया घटना पर चारों ओर सन्नाटा क्यों है?क्या यही दोहरा मापदंड नहीं है?अगर यही हरकत किसी और ने की होती, तो अब तक टीवी स्टूडियो में ट्रायल चल रहा होता।
यह चुप्पी अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। हम इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं और महिला सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।



