शब ए कद्र की दुआاللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي
अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल आफूआ, फाअफू अन्नी
तर्जुमा: या अल्लाह तू माफ़ करने वाला है और माफ़ करने को पसंद करता है इसलिए मुझे माफ़ फरमा !
📗📗📗🌟📗📗📗
राजनांदगांव: मुस्लिम समाज जामा मस्जिद के मीडिया प्रभारी सैय्यद अफज़ल अली ने कहा ईबादत और बरकत की मुक़द्दस रात ‘शब-ए-कद्र’ आज ख़ास दुआओं के लिए उठेंगे हजारों हाथ 🤲🏻 माह-ए-रमज़ान का मुकद्दस महीना अपने अंतिम पड़ाव यानी ‘आख़िरी अशरे’ में है, रमज़ान की सबसे बरकत वाली रात ‘शब-ए-कद्र’ को लेकर अकीदतमंदों में भारी उमंगों के साथ इबादत का जज़्बा है। सैय्यद अफज़ल ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि 26वें रोज़े के बाद आने वाली 27वीं शब इस बार 16 मार्च, सोमवार (पीर) यानी आज की रात को है। इस्लाम में इस रात की इबादत को हजार महीनों से भी अफजल रात माना गया है।
आज इस मुकद्दस रात में उम्मते मुस्लमा पूरी रात जागकर नमाज़, कुरान की तिलावत और दुआओं में मशगूल रहेंगे।
अतराफ की सभी मस्जदो में इस मौके = पर #रूहानी_माहौल के बीच कई खास प्रोग्राम आयोजित किए – जाएंगे। हर साल की तरह – इस बार भी शब-ए-कद्र की – रात मस्जिद में नमाज-ए-इशा – और तरावीह के बाद पूरी रात – इबादत का सिलसिला जारी – रहेगा। इस दौरान कुरआन-ए– करीम की तिलावत, इस्लाही – तकरीर, जिक्र-ओ-अजकार और दुआओं का खास एहतमाम किया जाएगा। शबे ए कद्र वह मुबारक और रहमतों से भरी रात है जिसे अल्लाह ने हजार महीनों से बेहतर क़रार दिया है ये रात बंदों के लिए अपने रब की बारगाह में झुककर इबादत करने अपने गुनाहों की तौबा करने और रहमत व मग़ाफिरत हासिल करने का बेहतरीन मौका होती,
यह रात रहमत, मग़फिरत और निजात की रात होती है, जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआओं को खास तौर पर कबूल फरमाता है। इसलिए मोमिनीन इस मुबारक घड़ी को गफलत में गंवाने के बजाय इबादत, तौबा और नेक आमाल में गुजारने की कोशिश करते हैं।
इबादत के लिए आने वाले नमाजियों के लिए पूरी रात बेहतर इंतजाम किए गए हैं। मस्जिद परिसर में साफ-सफाई, रोशनी और बैठने की उचित व्यवस्था के साथ-साथ रात भर इबादत करने वालों के लिए सेहरी का भी खास इंतजाम किया गया है, ताकि रोजेदार आसानी से अपनी सेहरी कर सकें।
सैय्यद अफज़ल ने सभी_अतराफ के तमाम मुस्लिम भाइयों से गुजारिश की है कि वे क़सिर तादाद में मस्जिद पहुंचकर इस मुबारक रात की बरकतों से फायदा उठाएं,
अल्लाह की बारगाह में दुआ करें और मुल्क में अमन-ओ-सुकून, भाईचारे और खुशहाली के
लिए दुआएं मांगें।
शब-ए-कद्र की यह रूहानी रात मुसलमानों के लिए इबादत, आत्ममंथन और अल्लाह से करीब होने का
बेहतरीन मौका मानी जाती है, जिसमें हर मोमिन अपनी दुआओं और नेक नियत के साथ रहमतों की बारिश का इंतजार करता।
एतिकाफ और इफ्तार का विशेष आयोजन_
मस्जिदों में 21वीं रात से ‘एतिकाफ’ का सिलसिला शुरू हो चुका है, जहाँ खुदा के नेक बंदे दुनियादारी से दूर होकर मुल्क की खुशहाली के लिए दुआएं कर रहे हैं। वहीं, ‘अलविदा जुमे’ (आखिरी शुक्रवार) को लेकर भी सभी मस्जिदों की कमेटी और अवाम द्वारा विशेष इंतजाम किया गया था। *सामूहिक इफ्तार के माध्यम से शहर में आपसी भाईचारे और मोहब्बत का संदेश दिया जा रहा है।
गुनाहों की माफी और मुल्क में अमन की दुआ`
सभी जिम्मेदारन ने उम्मत-ए-मुस्लिमा से अपील की है कि इन पाक और ताक रातों में रिज्क-सेहत-नेमत उम्रदराजी अपने मरहूमीन की मगफिरत अपने गुनाहों की माफी के साथ-साथ हिंदुस्तान में अमन-सुकून कायम रखने के लिए विशेष दुआ करें। उन्होंने कहा कि यह महीना रहमत और मगफिरत का पैगाम लेकर आता है।
विशेष_रिपोर्ट:` यह महत्वपूर्ण सूचना लिंक, पोर्टल, प्रिंट, सभी मुस्लिम समाज जामा मस्जिद के मीडिया प्रभारी #सैय्यद अफज़ल_अली द्वारा प्रेषित की गई है।



