… छत्तीसगढ़ में पुलिसकर्मी और उनकी पत्नी ने देहदान की घोषणा की ,भारत में प्रतिदिन लगभग 63 हजार लोगों को मृत्यु होती है जबकि देहदान या अंग दान की दर बहुत कम है प्रति 10 लाख आबादी पर 0.52 के करीब हालांकि 2023 में 17000 से अधिक अंगदान जीवित और मृत मिलकर हुए, लेकिन मृत्यु की तुलना में यह काफी कम है,कुल मृत्यु में से केवल 0.0001% से कम लोग ही देह दान कर पाते हैं, जबकि हर साल लगभग 5 लाख लोगों को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। ऐसे में संस्कारधानी राजनांदगांव जिले के एक छोटे से गांव – ग्राम.पोस्ट नवागांव थाना -सोमनी जिला -राजनांदगांव (वर्तमान 6वीं बटालियन रायगढ़ में आर. चालक के पद पर पदस्थ हूँ ) छ ग के एक परिवार के पति-पत्नी ने जरूरतमंदों को मरणोपरांत नये जीवन देने के लिए अंग दान एवं शरीर दान करने से चिकित्सा के छेत्र में बच्चे अध्यन -अध्यापन कर सके इस लिए लिये हम दोनों ने यह संकल्प लिये है, जो मानव समाज के लिए एक प्रेरणा है, परिवार के रूखमणी साहू और पति सोहन लाल साहू द्वारा मरणोपरांत शरीर दान एवं अंग दान कर लोगों क़ो जागरूक कर रहे हैं, साहू के माध्यम से शरीर दान, अंग दान के लिए लगभग 12 से 15 लोगों को भी प्रेरित कर चुके हैं, तथा समाजिक कुप्रथा मृत्यु भोज ना कर उस पैसे का उपयोग शिक्षा स्वास्थ्य एवं दूसरों की भलाई के लिए उपयोग करना चाहते हैं, तथा साहू द्वारा जरुरतमंदो क़ो अभी तक 14 बार रक्तदान कर लोगों नया जीवन दे चुके है,तथा जितने उम्र है उतने हीं जरुरतमंद लोगों क़ो रक्तदान कर नया जीवन देने का संकल्प है,जो इस वर्तमान परिदृश्य मे एक मिसाल है. रूखमणी साहू ने :सीएम साय को लिखा पत्र सीएम ने स्वास्थ्य विभाग को अग्रिम कार्यवाही हेतु लिखा पत्र अन्य राज्यों में जैसे M.P ओडिशा, तमिलनाडु, आन्द्रप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, गुजरात जैसे राज्यों में शरीर दान, अंग दान करने वाले व्यक्ति को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दिया जा रहा है, परंतु हमारे छ.ग राज्य में सिर्फ अंग दाताओं के परिजनों क़ो प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है, जो की समाज में जागरूकता लाने के लिए पर्याप्त नहीं है, अन्य राज्यों की तरह हमारे छ. ग. राज्य में भी शरीर दान एवं अंग करने वाले व्यक्तियों क़ो राजकीय सम्मान दे, ताकि लोगों मे निश्वार्थ भाव से शरीर दान, अंग दान के लिए आगे आये वा जागरूकता बढ़े,!



