अंबिकापुर शहर की विभिन्न सड़कों और सार्वजनिक क्षेत्रों में भीख मांगकर जीवनयापन कर रहे असहाय, बेघर एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों को घरौंदा आश्रम के प्रयास से नया जीवन मिला है। समाज कल्याण विभाग एवं अनामिका वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त सहयोग से इन व्यक्तियों को आश्रय, भोजन, वस्त्र और उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं।
घरौंदा आश्रम की टीम द्वारा नियमित सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत सड़क किनारे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा बाजार क्षेत्रों में रहने वाले भिक्षावृत्ति में लिप्त मानसिक विक्षिप्त लोगों को चिन्हित किया गया। इन्हें सम्मानपूर्वक आश्रम लाकर पंजीकृत कर विभाग को सूचना और चिकित्सकीय जांच के बाद साफ-सफाई, भोजन तथा मानसिक परामर्श की व्यवस्था की जाती है।
आश्रय प्राप्त करने के बाद व्यवस्थित दिनचर्या व नियमित खानपान से कई लोगों की मानसिक अवस्था मे सुधार या यह कहें पूर्ण रूप से स्वस्थ हो कर कई लोगो को संस्था द्वारा घर भेजा जा चुका है। कुछ हितग्राहियों ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें अब जीवन में नई दिशा और सम्मान की अनुभूति हो रही है। आश्रम संचालक ने बताया कि संस्था का उद्देश्य ऐसे विक्षिप्त एवं असहाय व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए , विभिन्न सामाजिक सहायता और समाज में पुनर्वास जैसी योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं।
अनामिका वेलफेयर सोसाइटी एवं घरौंदा आश्रम ने समाज के सभी नागरिकों से अपील की है कि सड़क पर किसी भी असहाय या भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्ति को देखकर उसकी सूचना संस्था या समाज कल्याण विभाग को दें, ताकि उसे उचित सहायता और सम्मानजनक जीवन मिल सके।
संचालिका रीता अग्रवाल कहती हैं कि घरौंदा आश्रय गृह केवल एक भवन नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का प्रतीक है। अनामिका वेलफेयर सोसायटी का यह प्रयास यह संदेष देता है कि “हर इंसान में बदलाव की क्षमता होती है, बस किसी को आगे बढ़कर उसका हाथ थामना होता है।” यह संस्था समाज को सहानुभूति, सहयोग और सेवा का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
अनामिका वेलफेयर सोसाइटी,
घरौंदा आश्रम, अंबिकापुर सरगुजा, (छत्तीसगढ़)



