*विश्रामपुर कॉलेज में मखौल बनी बी.कॉम की परीक्षा; छात्र बोले- ‘यह मानसिक प्रताड़ना है*’
*आजाद सेवा संघ की हुंकार: “जब डेढ़ घंटा विलंब हुआ, तो परीक्षा रद्द क्यों नहीं की गई? उच्च स्तरीय जांच हो*”
अंबिकापुर [1 जनवरी 2026]: संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की संवेदनहीनता और अक्षम कार्यप्रणाली का आज एक काला अध्याय तब सामने आया, जब बी.कॉम तृतीय सेमेस्टर (Human Resource Management) की परीक्षा देने पहुंचे छात्रों को घंटों तक खाली मेज-कुर्सी ताकनी पड़ी। विश्वविद्यालय प्रशासन की इस भारी चूक ने न केवल छात्रों के भविष्य को संकट में डाला है, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
संभाग के 90 कॉलेजों का भविष्य अधर में: रचित मिश्रा
आजाद सेवा संघ के रचित मिश्रा ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि, “संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा संभाग का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र है, जिसके अंतर्गत लगभग 90 महाविद्यालय संचालित होते हैं। जो अव्यवस्था आज विश्रामपुर महाविद्यालय में देखने को मिली है, प्रबल आशंका है कि संभाग के अन्य महाविद्यालयों में भी यही स्थिति निर्मित हुई होगी। यह कोई छोटी मानवीय भूल नहीं, बल्कि परीक्षा विभाग की प्रणालीगत विफलता है। क्या विश्वविद्यालय प्रशासन अन्य केंद्रों की स्थिति स्पष्ट करने का साहस दिखाएगा?”
परीक्षा विभाग की ‘ऐतिहासिक’ विफलता
आज सुबह 9:00 बजे से निर्धारित परीक्षा के लिए छात्र समय पर केंद्र पहुँच गए थे, लेकिन विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रहा। सुबह 10:30 बजे तक छात्र बिना प्रश्न-पत्र के मानसिक तनाव में बैठे रहे। रचित मिश्रा ने इसे परीक्षा विभाग की अब तक की सबसे बड़ी और शर्मनाक चूक करार दिया है।
विलंब होने पर परीक्षा रद्द करने की मांग
रचित मिश्रा ने कड़े शब्दों में कहा, “जब परीक्षा में 1.5 घंटे का विलंब हो चुका था, तो कायदे से इस परीक्षा को तत्काल रद्द किया जाना चाहिए था। इतने लंबे इंतजार के बाद छात्रों की मानसिक स्थिति ऐसी नहीं रह जाती कि वे एकाग्र होकर उत्तर लिख सकें। आधे-अधूरे मन से परीक्षा कराकर विश्वविद्यालय अपनी विफलता को ढंकने का प्रयास कर रहा है।”
छात्रों पर पड़ी दोहरी मार: मानसिक और आर्थिक नुकसान
ग्रामीण अंचलों से आने वाले छात्रों के लिए यह देरी मुसीबत बन गई। रचित मिश्रा ने बताया कि, “अधिकारी बंद कमरों में बैठकर छात्रों का दर्द नहीं समझ सकते। डेढ़ घंटे की देरी के कारण छात्रों की घर वापसी वाली बसें छूट गईं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक बोझ उठाकर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।”
आजाद सेवा संघ की अंतिम चेतावनी
आजाद सेवा संघ मांग करता है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच हो और परीक्षा विभाग के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। संघ ने सवाल किया कि छात्रों को हुए इस मानसिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा? रचित मिश्रा ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया और जवाबदेही तय नहीं की, तो संघ छात्र हितों की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।



