NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होना देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
22.79 लाख छात्रों की महीनों की मेहनत, सपने और भविष्य पर यह सिस्टम का सीधा तमाचा है।
किसी पिता ने कर्ज़ लिया,
किसी माँ ने गहने बेचे,
लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की,
और बदले में मिला, पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।
551 शहरों और लगभग 5400 परीक्षा केंद्रों के बावजूद अगर परीक्षा सुरक्षित नहीं रह पाती, तो यह सरकार और व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
एक तरफ मोदी सरकार “परीक्षा पर चर्चा” का कार्यक्रम करती रही, दूसरी तरफ देश के छात्र लगातार पेपर लीक, धांधली और री-एग्जाम की मार झेलते रहे। हर साल वही कहानी दोहराई जा रही है —
पेपर लीक, अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और छात्रों का मानसिक शोषण।
यह सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भरोसे का टूटना है।
परीक्षाओं की शुचिता निस्संदेह आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है संस्थागत उत्तरदायित्व। यदि हर बार व्यवस्थागत विफलताओं का बोझ छात्रों पर ही डाला जाएगा, तो यह केवल अन्याय नहीं, बल्कि संवेदनहीनता भी होगी। युवा पीढ़ी केवल निष्पक्ष परीक्षा ही नहीं, बल्कि अपने श्रम, अपने समय और अपने सपनों के प्रति सम्मान भी चाहती है। इन्हें संभाला जा सकता है बशर्ते लोकतंत्र का आशय येनकेन प्रकारेण चुनावी सफलता हासिल करना न हो।
केंद्र सरकार को इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में देश के युवाओं के सपनों के साथ ऐसा खिलवाड़ दोबारा न हो।
परवेज़ आलम गांधी
प्रदेश महासचिव
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग



