सरगुजा शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण (Rationalisation) प्रक्रिया के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले में कार्रवाई की धीमी रफ्तार और आरोपित अधिकारियों को संरक्षण देने के आरोपों के बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग) के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने आयुक्त सरगुजा संभाग और संयुक्त संचालक लोक शिक्षण को एक और स्मरण पत्र सौंपते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
परवेज आलम गांधी ने अपने आवेदन में कहा है कि उन्होंने 16 सितंबर 2025 को तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार सिन्हा और सहायक ग्रेड-02 बृजकिशोर तिवारी के खिलाफ युक्तियुक्तकरण में घोर भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। इसके बाद भी न सिर्फ दोनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई बल्कि अशोक सिन्हा को संभागीय संयुक्त संचालक पद पर पदोन्नत कर दिया गया और तिवारी को आज तक DEO कार्यालय से नहीं हटाया गया।

आरोप है कि संयुक्त संचालक शिक्षा ने तीन बार पत्र भेजकर तिवारी को अन्यत्र पदस्थ करने के निर्देश दिए, लेकिन तिवारी को वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी का करीबी बताकर आदेशों की अवहेलना की गई।
*सख्ती के बाद जारी हुआ आदेश*
लगातार दबाव के बाद जिला शिक्षा अधिकारी अम्बिकापुर ने अंततः 4 दिसंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए सहायक ग्रेड-02 बृजकिशोर तिवारी को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, गांधीनगर में आगामी आदेश तक भेज दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू बताया गया है।
परवेज आलम गांधी ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक अधिकारियों को उनके वर्तमान दायित्वों से दूर रखा जाना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच संभव हो सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वह भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को जल्द और पारदर्शी तरीके से पूरी करे।



