*‘विकसित भारत’ का नारा, लेकिन ‘वंचित भारत’ की अनदेखी*
अंबिकापुर/सरगुजा | दिनांक : 1 फरवरी 2026
केंद्र सरकार द्वारा आज संसद में प्रस्तुत बजट 2026 को लेकर आम जनता, मध्यम वर्ग, किसान, युवा, छोटे व्यापारी तथा विशेष रूप से OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक वर्गों में गहरी निराशा है। यह बजट बड़े-बड़े सपनों और घोषणाओं से भरा हुआ है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि इसमें सामाजिक न्याय, रोज़गार और महंगाई से राहत का स्पष्ट अभाव है।
*मध्यम वर्ग को सबसे बड़ा झटका*
बढ़ती महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास खर्च के बावजूद *इनकम टैक्स स्लैब में कोई ठोस राहत नहीं* दी गई। इससे साफ है कि सरकार ने नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग की वास्तविक परेशानियों को नज़रअंदाज़ किया है। जब जेब में पैसा नहीं बचेगा तो बाज़ार कैसे चलेगा और अर्थव्यवस्था कैसे आगे बढ़ेगी?
*OBC, SC, ST के लिए केवल भाषण, बजट नहीं*
देश की सबसे बड़ी आबादी OBC वर्ग के लिए न तो कोई अलग रोजगार पैकेज है, न शिक्षा में नई ठोस योजना और न ही व्यवसाय को बढ़ावा देने वाला विशेष फंड।
यह बजट एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर करता है कि
“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी”
का सिद्धांत केवल भाषणों तक सीमित कर दिया गया है।
*युवाओं को नौकरी नहीं, सिर्फ़ आश्वासन*
देश का युवा बेरोज़गारी से जूझ रहा है, लेकिन बजट में नई सरकारी नौकरियों की स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। स्किल डेवलपमेंट की बातें तो की गईं, लेकिन नौकरी की गारंटी नहीं दी गई। यह युवा भारत के भविष्य के साथ अन्याय है।
*किसान फिर से उपेक्षित*
किसानों को न तो MSP की कानूनी गारंटी मिली और न ही कर्ज़ से राहत। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसान की आय बढ़ाने के लिए कोई ठोस और भरोसेमंद उपाय इस बजट में नहीं दिखता।
छोटे व्यापारी और MSME दबाव में
छोटे व्यापारियों और MSME के लिए कर्ज़ की प्रक्रिया अब भी जटिल है। GST को सरल करने या ब्याज दरों में ठोस राहत देने की दिशा में कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया। इससे स्थानीय व्यापार और रोज़गार दोनों प्रभावित होंगे।
*महंगाई पर नियंत्रण नहीं*
पेट्रोल, डीज़ल, गैस और रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुओं की कीमतों पर कोई ठोस राहत नहीं दी गई। इसका सीधा असर गरीब और निम्न मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।
*शेयर बाजार की गिरावट* ने बजट की सच्चाई बता दी
बजट के तुरंत बाद शेयर बाजार में गिरावट यह संकेत देती है कि निवेशकों को भी इस बजट से भरोसा नहीं मिला। जब निजी निवेश धीमा होगा, तो नए उद्योग और रोजगार कैसे आएंगे?
कुल मिलाकर *निष्कर्ष*
यह बजट कॉरपोरेट केंद्रित दिखाई देता है, जबकि
आम आदमी, किसान, युवा और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग हाशिए पर हैं।
सरकार को चाहिए था कि वह विकास के साथ-साथ सामाजिक संतुलन और न्याय को प्राथमिकता देती, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बजट उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
हम इस बजट के माध्यम से सरकार से मांग करते हैं कि
*OBC, SC, ST के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए जाएँ*
*युवाओं को ठोस रोजगार योजना दी जाए*
*किसानों को MSP की कानूनी गारंटी मिले*
*मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों को वास्तविक आर्थिक राहत दी जाए*
लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता



