आज का बजट नहीं, जनता के साथ खुला विश्वासघात है। यह बजट युवाओं के सपनों, किसानों की मेहनत और मध्यम वर्ग की जेब पर सीधा हमला है।
देश का युवा बेरोज़गार है, लेकिन सरकार को सिर्फ़ अपने पूंजीपति दोस्तों की चिंता है। बजट में रोजगार के नाम पर एक भी ठोस योजना नहीं है — सिर्फ़ जुमले और झूठे दावे हैं।
महंगाई आसमान छू रही है, गैस-पेट्रोल आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुका है, लेकिन इस बजट में जनता को राहत देने के बजाय सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है।
किसानों को MSP की कानूनी गारंटी देने की हिम्मत सरकार में नहीं है और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर बजट में भारी कटौती की गई है।



