अम्बिकापुर/ मोमिनपुरा क्षेत्र के वार्डो में पीलिया के 42 से अधिक मरीज सामने आने और पेयजल जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि होने के बाद नेता प्रतिपक्ष शफ़ी अहमद ने कलेक्टर को वस्तुस्थित से अवगत कराया है। उन्होंने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए तत्काल समन्वित कार्रवाई की मांग की है।
नगर निगम में विपक्ष के नेता शफी अहमद ने बताया कि 14 फरवरी को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवागढ़ की टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्र से लिए गए पेयजल सैंपलों की जांच मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कराई गई। जारी रिपोर्ट के अनुसार कई नमूनों में एमपीएन की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। कुछ सैंपलों में 22 से 28 एमपीएन प्रति 100 एमएल तक बैक्टीरियल लोड दर्ज किया गया, जो पेयजल की श्रेणी में स्वीकार्य नहीं है।मानक के अनुसार पेयजल में एमपीएन की संख्या शून्य होनी चाहिए। 10 से अधिक एमपीएन संदिग्ध तथा 50 से अधिक अत्यधिक प्रदूषित माना जाता है। सीवर में पाए जाने वाले फिकल कोलीफॉर्म और ई-कोलाई की पेयजल में मौजूदगी जलजनित गम्भीर बीमारियों का कारण है, जो क्षेत्र में बढ़ते पीलिया मामलों से सीधे तौर पर जुड़ी हो सकती है।
शफ़ी अहमद ने कलेक्टर को बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पत्र लिखकर जल स्रोत के डिसइंफेक्शन, पाइपलाइन और पंप की जांच, प्लेटफॉर्म रखरखाव तथा संरचनात्मक खामियों को दूर करने के निर्देश दिए गए थे। नगर निगम जल शाखा की टीम कुछ स्थानों से पानी का सेम्पल भी लिया है।स्वास्थ्य विभाग की टीम भी सक्रिय हुई है।बावजूद इसके, क्षेत्र में प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रही है।
उन्होंने मोमिनपुरा, नवागढ़, रसूलपुर, जरहागढ़ और श्रीगढ़ क्षेत्रों में
घर-घर सर्वे कर संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उपचार सुनिश्चित करने,नगर निगम और पीएचई विभाग संयुक्त रूप से व्यापक जल सैंपलिंग अभियान चलाने और जल आपूर्ति तंत्र की तकनीकी ऑडिट कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह केवल एक क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि पूरे शहर की पेयजल सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शिता के साथ नियमित मॉनिटरिंग रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि हाल ही में इंदौर में दूषित पेयजल के कारण फैली बीमारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है। अंबिकापुर में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अभी से सख्त और ठोस कदम उठाना आवश्यक है।



