*मुख्य वक्ता योग शक्ति गीता दीदी जी ने* श्रीमद् भगवत गीता ज्ञान के तृतीय सत्र में बताया कि महाभारत युद्ध भूमि में जब अर्जुन ने मोह, भ्रम ,और दुख में थे तब उन्होंने भगवान से केवल युद्ध की बात नहीं पूछा बल्कि *परम सत्य, आत्मा, धर्म, कर्म ,परमात्मा और जीवन के रहस्य भी पूछा* अर्जुन बार-बार प्रश्न इसलिए पूछ रहें थे क्योंकि वह भगवान के वास्तविक स्वरूप को जानना चाहते थे। कहते हैं

हे भगवान! मेरा स्वभाव कायरता से दब गया हैl मैं धर्म के विषय से और आपका सत्य स्वरूप से भ्रमित हूं l मैं आपका शिष्य हूं मुझे सही मार्ग बताइएl
अर्जुन ने स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कियाl
जब मनुष्य अहंकार छोड़कर प्रश्न करता है, तभी सत्य ज्ञान मिलता हैl कहते हैं कि गीता का जन्म अर्जुन के प्रश्नों से हुआl
अर्जुन भगवान से पूछते हैं की
मैं निरंतर आपको चिंतन करते हुए आपको किस प्रकार जानू? आप किन-किन भावों में मेरे द्वारा चिंतन करने योग्य हैं अर्थात आपको मैं कैसे ध्यान करूं?
भगवान कहते हैं, तु मुझे इन साधारण आंखों से नहीं देख सकता मैं तुझे दिव्य नेत्र देता हूं, जिससे तू मेरे ईश्वरीय स्वरूप को देख सकेl
तभी परमात्मा अपना दिव्य स्वरुप दिखाते हैं, तब अर्जुन कहते हैं आप ही पार ब्रह्म परमेश्वर है, आप ही सबसे पवित्र हैl आप अनादि, अविनाशी, दिव्य परम पुरुष हैl
आप ही कालों के काल महाकाल हैं, देवों के देव महादेव हैl सत्य स्वरूप के परिचय के बाद अर्जुन का पूरा प्रश्न समाप्त हो जाता है, इससे पहले अपना सखा, समझता था परंतु विराट हजारों सूर्य से तेजोमय निराकार परमात्मा का साक्षात्कार करने के बाद अर्जुन का प्रश्न समाप्त हो गयाl
तत्पश्चात *माननीय टी .एस. सिंह देव जी* अपना अनुभव बताते हुए कहां भगवत गीता सुनने के बाद मेरे जीवन में एक ही बात समझ में आया की चाहे कोई भी धर्म का जाति का हो सबके साथ समान व्यवहार करना चाहिए क्योंकि हम सब एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैl
सरगुजा संभाग संचालीका आदरणीय विद्या दीदी जी ने सभी अतिथि एवं श्रद्धालुओं का स्वागत एवं श्रीमद् भगवत गीता ज्ञान का उद्देश्य बताएl
इस कार्यक्रम में राज परिवार सहित शहर के श्रद्धालुओं भारी संख्या में उपस्थित रहेl
यह कार्यक्रम 18 अप्रैल संध्या 5:00 से 8:00 तक चलेगाl रोज सुबह 6:00 बजे से म्यूजिकल एक्सरसाइज तथा पॉजिटिव थिंकिंग ,मेडिटेशन कराया जाता हैl



