अंबिकापुर में घटी एक अत्यंत दर्दनाक एवं अमानवीय घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। विदित है कि गंगापुर भुईयापाडरा 45 वर्षीय महिला मृतिका महेंद्रो बाई के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी गई, जिससे पूरे समाज में गहरा आक्रोश एवं शोक व्याप्त है। इस हृदय विदारक घटना के बीच मानवता और संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक मिसाल भी सामने आई है।
मृतिका महेंद्रो बाई के परिवार में केवल उसका एकमात्र पुत्र ही है। परिवार में अन्य किसी सदस्य के अभाव के कारण उनका अंतिम संस्कार कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था। आर्थिक, सामाजिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों के चलते परिजन अत्यंत असहाय स्थिति में थे।

इसी दौरान जब मृतिका के पुत्र को यह जानकारी मिली कि अनोखी सोच संस्था ऐसे जरूरतमंद एवं असहाय लोगों के अंतिम संस्कार में सहयोग प्रदान करती है, तो उसने तत्काल संस्था के अध्यक्ष श्री सूर्य प्रकाश साहू जी से संपर्क किया। सूचना प्राप्त होते ही संस्था के अध्यक्ष एवं समस्त सदस्यों ने संवेदनशीलता एवं तत्परता दिखाते हुए सहयोग का आश्वासन दिया।
इसके उपरांत, संस्था के सदस्यों द्वारा गंगापुर स्थित मुक्तिधाम में मृतिका महेंद्रो बाई का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान, धार्मिक परंपराओं एवं सम्मान के साथ संपन्न कराया गया। संस्था के सदस्यों ने न केवल अंतिम संस्कार की समस्त व्यवस्था की, बल्कि शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में मानसिक एवं सामाजिक संबल भी प्रदान किया।
इस पुनीत कार्य में संस्था के सदस्यों – प्रकाश साहू, अभय साहू, पंकज चौधरी, संजु चटर्जी, मोती ताम्रकार, सुनील साहू, चंद्रप्रताप सिंह, बिट्टू मिश्रा, अजय ताम्रकार, निशांत जायसवाल, लाला साहू, बनाफ़र केरकेट्टा , सत्यम साहु, विकाश साहू, नितेश, गजानंद, ननकू मुंडा,मिथलेश, मनोज अग्रवाल , नीरज साहू, अजय साहू, सौरभ दास, भोला रक्सेल एवं अन्य सदस्यों – का विशेष योगदान रहा।
जहाँ एक ओर इस प्रकार की जघन्य एवं निंदनीय घटना समाज को शर्मसार करती है, वहीं दूसरी ओर अनोखी सोच संस्था यह प्रमाणित करता है कि आज भी समाज में मानवीय मूल्य, करुणा एवं सहानुभूति जीवित हैं। संस्था द्वारा किया गया यह कार्य न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश एवं प्रेरणा का स्रोत भी है।



