ये केवल एक हादसा नहीं, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट उदाहरण है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि इस घटना की कड़ी निंदा करता है और इसे अत्यंत गंभीर मामला है रेस्क्यू सेंटर जैसे स्थान, जहां घायल और संरक्षित वन्यजीवों को सुरक्षा प्रदान की जाती है, वहां इस प्रकार की घटना होना कई सवाल खड़े करता है। यह स्पष्ट करता है कि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे या फिर उनकी सही तरीके से निगरानी नहीं हो रही थी।

हम राज्य सरकार और संबंधित विभाग से यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या रेस्क्यू सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा नहीं की जाती थी? यदि की जाती थी, तो फिर इस प्रकार की घटना को रोका क्यों नहीं जा सका? यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति उदासीनता को भी दर्शाता है।
परवेज़ गांधी ने वन विभाग मांग करता है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, सभी रेस्क्यू सेंटरों और वन्यजीव संरक्षण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर उसे मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वन्यजीव हमारे पर्यावरण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस तरह की घटनाएं न केवल हमारी संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि हमारी संवेदनशीलता पर भी चोट पहुंचाती हैं।
हम आशा करते हैं कि भाजपा सरकार इस गंभीर घटना को संज्ञान में लेते हुए त्वरित और ठोस कदम उठाएगी तथा दोषियों को दंडित कर वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साबित करेगी।
परवेज़ आलम गांधी
प्रदेश महासचिव
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी,अल्पसंख्यक विभाग



