सरगुजा, अम्बिकापुर
इस वर्ष ईद और नवरात्रि का पावन अवसर लगभग एक साथ पड़ रहा है, जो भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का एक खूबसूरत प्रतीक है।
नवरात्रि का पर्व माँ दुर्गा की शक्ति, सत्य की विजय और बुराई पर अच्छाई की फ़तह का संदेश देता है, वहीं ईद का मुबारक त्योहार मोहब्बत, बराबरी, रहमत और इंसानियत की तालीम देता है। ये दोनों पर्व हमें यह सिखाते हैं कि समाज में अमन, सहिष्णुता और आपसी सम्मान की कितनी अहम भूमिका है।
भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता है, जहाँ अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर भाईचारे और इंसानियत का उदाहरण पेश करते हैं। मंदिर की घंटियों और मस्जिद की अज़ान का एक साथ गूंजना इस देश की क़ौमी एकता का जीवंत प्रमाण है।
इस पावन अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम नफ़रत के बजाय मोहब्बत फैलाएँगे, एक-दूसरे के धर्म और आस्थाओं का सम्मान करेंगे तथा हर व्यक्ति के मानवाधिकार, सम्मान और बराबरी की रक्षा करेंगे।
हिंदू-मुस्लिम एकता, आपसी भाईचारा और इंसानियत ही हमारे देश की सबसे बड़ी ताक़त है और यही हमारे उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद भी है।
अंत में, सभी देशवासियों को ईद और नवरात्रि की दिली मुबारकबाद एवं हार्दिक शुभकामनाएँ। दुआ है कि यह पावन अवसर देश में अमन, खुशहाली और तरक़्क़ी लेकर आए।



