‘दक्षिणा’ को लेकर संस्कृति मंत्री पर आरोप, लेकिन मामला कुछ और ही…
रायपुर, 14 मार्च। एक कथावाचक द्वारा संस्कृति मंत्री पर भागवत कथा का भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगाकर आत्मदाह की धमकी देने का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा। हालांकि यह मामला ठीक कुछ और ही बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार वृंदावन के कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज का एक वीडियो फेसबुक पर वायरल हुआ, जिसमें वे छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन, नवा रायपुर के पास से वीडियो बनाकर यह कहते दिखे कि उन्होंने जनवरी में लखनपुर में श्रीमद् भागवत कथा का वाचन किया था, जिसकी 15 लाख रुपये की राशि उन्हें अब तक नहीं मिली है। उन्होंने राशि नहीं मिलने पर आत्मदाह की धमकी भी दी थी।
मामले की जानकारी लेने पर पता चला कि अंबिकापुर जिले के लखनपुर क्षेत्र के एक शिव मंदिर में स्थानीय महिला नेत्री द्वारा 2 से 9 जनवरी तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन कराया गया था, जिसमें कथावाचन डॉ. रामानुरागी महाराज ने किया था। आयोजन के बाद महिला नेत्री ने कथावाचक के साथ मिलकर संस्कृति विभाग से 15 लाख रुपये अनुदान देने का आग्रह करते हुए लिखित आवेदन भी दिया था।
बताया गया कि राजेश अग्रवाल ने उन्हें स्पष्ट कर दिया था कि इस तरह के धार्मिक आयोजन के लिए अनुदान देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने आवेदन को विभाग को अग्रेषित कर दिया था।
इसके बाद कथावाचक रायपुर पहुंचे और मंत्री से मुलाकात कर राशि स्वीकृत नहीं होने की जानकारी ली। उस समय मंत्री विधानसभा के लिए निकल रहे थे, इसलिए उन्होंने अधिकारियों से मामले को देखने के लिए कह दिया। बताया जाता है कि कथावाचक ने मंत्री निवास में भोजन भी किया था।
इस मामले पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि उनके द्वारा किसी भी श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन नहीं कराया गया था। लखनपुर की एक महिला द्वारा यह आयोजन कराया गया था और सहयोग राशि के लिए अनुरोध किया गया था, जिसे नियमों के अभाव में संभव नहीं बताया गया था। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले कथावाचक उनसे मिले भी थे और उनके निवास पर भोजन कर गए थे, ऐसे में बाद में वीडियो जारी करना हैरानी की बात है।



