ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को दवा विक्रय हेतु औषधि लाइसेंस (फॉर्म 20ए व 21ए) देने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। संगठन के अध्यक्ष जे.एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि दवाओं का वितरण सामान्य व्यापार नहीं है, बल्कि यह अत्यंत जिम्मेदारी और तकनीकी ज्ञान से जुड़ा कार्य है।
उन्होंने कहा कि दवाएं जीवन रक्षक उत्पाद हैं और इनके सुरक्षित भंडारण व सही वितरण के लिए पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति अनिवार्य होती है। PACS जैसे केंद्रों पर, जहां खाद और कीटनाशकों का भंडारण होता है, वहां दवाओं के भंडारण से क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा बढ़ सकता है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सरगुजा औषधि विक्रेता संघ के अध्यक्ष अमित मिंटू अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही पर्याप्त संख्या में लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर्स उपलब्ध हैं, इसलिए दवा विक्रय के नियमों में किसी प्रकार की शिथिलता देने की आवश्यकता नहीं है।
संघ के उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने सरकार से मांग की है कि PACS को दवा लाइसेंस देने के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा वितरण से एंटीबायोटिक के दुरुपयोग और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
संघ ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने तथा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की मूल भावना की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।



